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सोमवार, 30 दिसंबर 2019

शिक्षा में आदर्शवाद, प्रकृतिवाद, यथार्थवाद और प्रयोजनवाद


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आदर्शवाद 

आदर्शवाद का अर्थ 
आदर्शवाद को अंग्रेजी में (आइडियलिज्म) कहा जाता है । यह दो शब्दों से मिलकर बना है, एक शब्द आइडिया और दूसरा शब्द इज में है । बीच में (एल) उच्चारण के सौंदर्य के लिए प्रयुक्त किया गया है । आइडिया का अर्थ है विचार और अहम का अर्थ वाद होता है । इसलिए इसे विचारवाद भी कहा जाता है । वर्तमान समय में प्रत्ययवाद, विचारवाद, अध्यात्मवाद के स्थान पर आदर्शवाद शब्द का अधिक प्रयोग किया जाता है । आदर्शवादी दार्शनिक विचारों को ही सत्य मानते हैं । प्लेटो ने भी चिंतन, विचारों और तर्क आदि को महत्व दिया है ।

आदर्शवाद की परिभाषाएँ
आदर्शवाद की कुछ प्रमुख परिभाषाएं निम्नलिखित हैं -

ऐडम्स के अनुसार, "आदर्शवाद एक अथवा दूसरे रूप में दर्शन के समस्त इतिहास में व्याप्त है ।"

हरण के अनुसार, " आदर्शवादी शिक्षा दर्शन मानसिक जगत का मानव को अभिन्न अंग समझने की अनुभूति का वितरण है ।"

आदर्शवाद के मूल तत्व 
आदर्शवाद की तत्व मीमांसा :- आदर्शवादी विचारधारा विचार पर आधारित है । इसके अनुसार विचार ही सत्य है । भौतिक जगत असत्य है । आत्मा और आध्यात्मिक चिंतन को महत्व दिया गया है । प्लेटो ने कहा, संसार भौतिकता में नहीं बल्कि विचारों में है । प्लेटो मन एवं तर्क को प्रमुख मानता है । डेकार्ट ने भी मन को ही प्रमुख माना है । स्पिनोजा ने आध्यात्मिकता को ही स्वीकार किया । लाइव वेनीज ने कहा कि यह संसार चिन्ह बिंदुओं से निर्मित है । बर्कले ने पदार्थ के अस्तित्व को आध्यात्मिक आधार पर स्वीकार किया । काण्ट के अनुसार प्रत्येक प्रतीत होने वाली वस्तु के पीछे एक अज्ञात और अज्ञ तत्व है जिसके द्वारा ही सब कुछ संचालित होता है । हीगल ने समस्त विश्व को एक पूर्णता के रूप में देखा है । आदर्शवाद की तत्व मीमांसा को निम्नलिखित वर्गों में विभाजित किया जा सकता है -

(1) आत्मनिष्ठ आदर्शवाद :- इस विचारधारा के प्रवर्तक बर्कले हैं बर्कले के शब्दों में वाहे जगत और कुछ नहीं केवल मन का प्रत्यक्षीकरण है ।
(2) वस्तुनिष्ठ आदर्शवाद :- इस विचारधारा के प्रवर्तक प्लेटो है उनके अनुसार विचार सत्य है । प्रकृति और भौतिक जगत सत्य नहीं है ।
(3) निरपेक्ष आदर्शवाद :- इस विचारधारा के पक्षधर हीगल हैं । उनके अनुसार आत्मा का चरम रूप परमात्मा है और वही वस्तु जगत का निर्माण करने वाला है ।
(4) प्रपंचात्मक आदर्शवाद :- इसके प्रवर्तक इमानुएल कांट हैं । उनके अनुसार जगत की पदार्थ का ज्ञान प्रत्यक्ष रूप से ना होकर परोक्ष रूप से होता है । काण्ट ने बुद्धि को वस्तु की ज्ञान का आधार माना है इसीलिए उनकी विचारधारा बुद्धि वादी आदर्शवाद कहलाती है ।
(5) आधुनिक आदर्शवाद :- जर्मनी में आदर्शवाद की समाप्ति के पश्चात इंग्लैंड स्कॉटलैंड इटली तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में आदर्शवादी विचारधारा ने नया रूप ग्रहण किया । ब्रिटेन में सैमुअल, डायलर, कॉलरिज, जेम्स स्टर्लिंग आदि ने आदर्शवादी विचारधारा को अपनाया । इटली में जैन टाइल महोदय ने आदर्शवादी विचारधारा को आगे बढ़ाया । अमेरिका में हरीश वह हार न प्रसिद्ध आदर्शवादी दार्शनिक हुए ।

आदर्शवाद की ज्ञान मीमांसा :- आदर्शवाद एक ज्ञान मीमांसा का दर्शन है सुकरात के दर्शन में बुद्धि वाद देखने को मिलता है सुकरात के अनुसार वास्तु विज्ञान अवधारणाओं के माध्यम से प्राप्त होता है प्लेटो ने सुकरात की वस्तुनिष्ठ अवधारणाओं को वस्तुनिष्ठ में परिवर्तित करके विचारों की संज्ञा दी प्लेटो ने ज्ञान को तीन रूपों में बांटा है इंद्रिय जन्य ज्ञान सम्मति जन्य ज्ञान हुआ चिंतन जन्य ज्ञान बर्कले सत्य ज्ञान की प्राप्ति कार आधार आत्मा को मानते थे काटने आत्मा क्या स्थान पर तकना बुद्ध को ज्ञान का आधार माना है ।

आदर्शवाद की मूल्य मीमांसा :- आदर्शवाद के अनुसार जीवन के अंतिम मूल्य सत्यम, शिवम और सुंदरम माने गए हैं । इन मूल्यों की प्राप्ति के लिए नैतिक जीवन जीना आवश्यक है । नैतिक जीवन जीने के लिए मनुष्य में चार सद्गुण संयम, धैर्य, ज्ञान और न्याय का होना आवश्यक है । यदि मनुष्य इन सद्गुणों को प्राप्त कर लेता है तो सत्यम, शिवम, सुंदरम की प्राप्ति कर अंतिम उद्देश्य आत्मानुभूति को प्राप्त कर लेता है ।

आदर्शवाद और शिक्षा के उद्देश्य 
आदर्शवादियों ने शिक्षा के निम्नलिखित उद्देश्य बताया है -

(1) व्यक्तित्व का उच्चतम विकास या आत्मानुभूति :- आदर्शवाद में मानव व्यक्तित्व को सर्वोच्च तथा उच्च उत्कृष्ट ईश्वरी कृति माना गया है । इसलिए जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य व्यक्तित्व का उचित विकास अथवा सहानुभूति है । दूसरे शब्दों में व्यक्तित्व में निहित शक्तियों का पूर्ण विकास अनुभूति है आदर्श वादियों के अनुसार आत्मानुभूति की चरम अवस्था में व्यक्ति को सत्यम शिवम सुंदरम की अनुभूति होनी चाहिए ।

(2) आध्यात्मिक विकास :- आदर्शवाद आध्यात्मिक पूर्णता अथवा आत्मानुभूति को ही भक्तों का पूर्ण विकास मानता है आदर्शवादी शिक्षा का उद्देश्य बालकों का आध्यात्मिक विकास करना है और उसके अनुकूल शिक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए ।
(3) अमर आदर्श एवं मूल्यों की प्राप्ति :- आदर्शवादियों के अनुसार सत्यम, शिवम, सुंदरम मानव जाति के आध्यात्मिक आदर्श एवं जीवन के साथ मूल्य शिक्षा का स्वरूप ऐसा होना चाहिए, जो मनुष्य को इन मूल्यों की प्राप्ति में सहायक हो इन आदेशों की लक्ष्मी को ध्यान में रखकर मस्तिष्क सकते को जानता है और असत्य से दूर रहता है, सुंदरता का अनुभव करता और संत और सुंदरता से दूर रहता है । अच्छाई का संकल्प करता है और बुराई से दूर रहता है ।

(4) सांस्कृतिक विरासत की समृद्धि :- आदर्शवादियों के अनुसार शिक्षा का अन्य महत्वपूर्ण उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत की समृद्धि है । सांस्कृतिक संपदा के संरक्षण और विकास में सहयोग देकर ही व्यक्ति एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को अपनी संस्कृति हस्तांतरित कर सकता है ।

(5) बालक का बौद्धिक विकास :- आदर्शवादियों का मानना है कि मनुष्य की बुद्धि, विवेक उसके सभी आदर्शों तथा आध्यात्मिक चेतनाओं का आधार होता है । विकास को प्राथमिकता दी है शिक्षा का प्रमुख बालक का विकास होना चाहिए, तभी वह अपनी क्षमता के द्वारा नियमों का ज्ञान प्राप्त कर सकता है । शब्दों में शिक्षा का मुख्य उद्देश्य बालक की बुद्धि एवं विकसित करना है ।

आदर्शवाद और पाठ्यक्रम 
आदर्श वादियों के अनुसार बालक के व्यक्तित्व के ज्ञानात्मक, क्रियात्मक एवं भावनात्मक तीनों ही पक्षों का विकास करने के लिए तीनों पक्षों को पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाए ।

1. प्लेटो के विचार :- प्लेटो ने मानव जीवन का अंतिम उद्देश्य आत्मानुभूति को माना है और इसके लिए सत्यम, शिवम सुंदरम की प्राप्ति आवश्यक है । यह दिनों मूल्य मनुष्य की बौद्धिक एवं नैतिक कलात्मक क्रियाओं के द्वारा प्राप्त होते हैं । पाठ्यक्रम में उन्हीं विषयों का समावेश हो, जो मानव को उपर्युक्त क्रियाओं में दक्षता प्रदान करें । बौद्धिक क्रियाएं भाषा साहित्य इतिहास भूगोल गणित विज्ञान । कलात्मक क्रियाएँ कला काव्य नैतिक क्रियाएं धर्मशास्त्र अध्यात्म वाद ।

2. नन के विचार :- उनके अनुसार पाठ्यक्रम में उन्हीं विषयों को शामिल करने किया जाना चाहिए जिनसे मनुष्य को मानव सभ्यता एवं संस्कृति की झलक मिल सके और जिनकी द्वारा बच्चों को कुछ विशेष क्रियाओं में अनुशासित किया जा सके । । मनुष्य की क्रिया है शारीरिक सामाजिक व धार्मिक क्रियाएं इसमें शारीरिक व्यायाम सामाजिक शिक्षा नीति शास्त्र व धर्म शामिल है दूसरा साहित्यिक सौंदर्य आत्मक हुआ सामान्य ज्ञान इसमें साहित्य कला संगीत विज्ञान गणित इतिहास भूगोल

पाठ्यक्रम के बारे में लिखा है कि विकास के लिए शिक्षा का स्वरूप आध्यात्मिक विकसित करने का होना चाहिए शिक्षण कौशल

4. हरबर्ट के अनुसार :- शिक्षा का एकमात्र उद्देश्य नैतिकता का विकास है और इसलिए वह पाठ्यक्रम में विषयों की सभ्यता के विकास में सहायक है मनुष्य की क्रिया क्रिया मानवीय विषय इसमें साहित्य इतिहास कला संगीत शामिल है वैज्ञानिक विषय भूगोल विज्ञान गणित ।

 आदर्शवाद और शिक्षण विधियां विभिन्न आदर्श वादियों ने विभिन्न शिक्षण विधियों को अपनाया जो निम्नलिखित है पहला आगमन एवं निगमन विधि अरस्तु ने इस विधि द्वारा शिक्षा दिए जाने पर बल दिया आगमन विधि सामान्य से विशिष्ट की ओर निगमन विधि विशिष्ट से सामान्य की ओर प्रश्न उत्तर विधि इस विधि का प्रयोग सुकरात ने किया संवाद विधि प्लेटो ने इस विधि का विकास किया तर्क विधि ईगल ने तर्क विधि को अपनाया निर्देश भी दिए निर्देश विधि का प्रयोग किया खेल विधि प्रावेल ने खेल द्वारा शिक्षा पर बल दिया अभ्यास व आवृत्ति विधि पेस्टोलॉजी ने अभ्यास हुआ अमृत विधि को सर्वश्रेष्ठ मारा

प्रकृतिवाद

प्रकृतिवाद का अर्थ
प्रकृतिवाद शब्द में प्रकृति शब्द का दो अर्थ में प्रयोग किया गया है भौतिक प्रकृति और मानव प्रकृति भौतिक प्रकृति को दर्शनशास्त्र के प्रकृति वादी सिद्धांत में वह वस्तु माना गया है मानव प्रकृति की व्याख्या मनोविज्ञान करता है शिक्षा के क्षेत्र में प्रकृतिवाद के प्रभाव में प्रकृति से अधिकतर तात्पर्य मानव प्रकृति से ही है प्रकृति वादी दर्शन जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है प्रकृति को ही संपूर्ण दोस्त मानता है प्रकृतिवाद के समर्थकों में अरस्तु कामटे हादसे बेकन डार्विन लैमार्क हक्सले हरबर्ट स्पेंसर बर्नार्ड शा सैमुअल बटलर तथा रूस आदि प्रमुख है ।

प्रकृतिवाद की परिभाषाएं
थामस और लाएंगे के अनुसार प्रकृतिवाद आदर्शवाद के विपरीत मन को पदार्थ के अधीन मानता है और यह विश्वास करता है कि अंतिम वास्तविकता भौतिक है आध्यात्मिक नहीं जेम्स वार्ड प्रकृतिवाद वह सिद्धांत है जो प्रकृति को ईश्वर से पृथक करता है आत्मा को पदार्थ के अधीन करता है और अपरिवर्तनीय नियमों को सर्वोच्च था प्रदान करता है ब्राइस के अनुसार प्रकृतिवाद एक प्रणाली है और जो कुछ आध्यात्मिक है उसका बहिष्कार ही उसकी प्रमुख विशेषता है ।

प्रकृतिवादी दर्शन
प्रकृतिवाद की तत्व मीमांसा
प्रकृतिवाद कि तत्व मीमांसा का हम निम्न प्रकार से वर्णन कर सकते हैं पदार्थ ही जगत का आधार है पदार्थ मनुष्य अथवा जीवन की व्याख्या यह दर्शन भौतिक व रासायनिक नियमों से करता है प्रकृति ही सब कुछ एस्केप अरे कुछ भी नहीं प्रकृति वादियों के अनुसार आत्मा पदार्थ जन चेतन तत्व है प्रकृतिवाद आत्मा को पदार्थ का ही अंग मानते हैं प्रकृतिवाद आध्यात्मिकता के विपरीत है संपूर्ण सृष्टि में नियम विद्यमान हैं सब कार्य नियमानुसार होते हैं यह नियम प्रकृति के स्वयं के नियम है मनुष्य भी प्रकृति का अंग है ।

प्रकृतिवाद की ज्ञान मीमांसा प्रकृति का ज्ञान ही वास्तविक ज्ञान है प्रकृति का ज्ञान प्राप्त करना ही मनुष्य जीवन का लक्ष्य है प्रकृति ज्ञान प्राप्ति का साधन इंद्रियां है प्रकृति वादी ज्ञान प्राप्ति के लिए निरीक्षण वैज्ञानिक विधि या आगमन विधि को महत्वपूर्ण मानते हैं रूसो ने शिक्षा के वस्त्रों पर प्रत्यक्ष ज्ञान को महत्वपूर्ण स्थान प्रदान करने के लिए कहा है सत्य को अनुभव से प्राप्त करने के समर्थक हैं ।

प्रकृतिवाद की मूल्य मीमांसा प्रकृति वादियों के अनुसार मूल्य प्रति में ही विद्यमान है समाज द्वारा निर्धारित मूल्यों को यह स्वीकार नहीं करते प्रकृतिवाद यूनेस्को सर्वोच्च स्थान दिया है यह कोई आध्यात्मिक और नैतिक बंधन स्वीकार नहीं करता मनुष्य को अपनी प्रकृति के अनुकूल आचरण करना चाहिए

 प्रकृतिवाद तथा शिक्षा के उद्देश्य प्रकृति वादियों के अनुसार शिक्षा के उद्देश्य निम्नलिखित हैं जीवन संघर्ष के लिए प्रस्तुत करना विकासवाद सिद्धांत के प्रतिपादक प्रसिद्ध प्राणी शास्त्री डार्विन के अनुसार संसार में प्रत्येक प्राणी को अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ता है अतः शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य इस शक्ति का विकास करना भी होना चाहिए जिसके कारण वह जीवन संघर्ष में सफल हो सके सुख प्रदान करना है जैविक प्रकृति वादियों के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य मानव के वर्तमान सुख एवं प्रसन्नता को प्राप्त करना एवं सुरक्षित रखना है मूल प्रवृत्तियों का शोधन एवं मार्ग आंतरिक करण प्रसिद्ध विद्वान मैक दुग्गल उपर्युक्त सुख-दुख के सिद्धांत से सहमत नहीं है वह सुख दुख को प्राकृतिक प्रक्रिया का ही परिणाम मानता है शिक्षा का उद्देश्य बालक की मूर्तियों का शोधन एवं उचित दिशा में मार्ग आंतरिक करना है अनुकूल वातावरण बनाना और समायोजन करना प्रकृति वादियों के अनुसार प्राणी में अपने आपको अपनी आदतों को और अपने शारीरिक ढांचे को अपनी वर्तमान परिस्थितियों के अनुकूल बनाने की शक्ति होती है जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए वातावरण से समायोजन करना अनिवार्य है नैसर्गिक शक्तियों का विकास नैसर्गिक शक्तियों का विकास बालक का विकास है इस विकास में शारीरिक विकास भी नहीं होता है और दूसरों के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य बालक को अपनी प्रकृति तथा नैसर्गिक गुणों के अनुसार फतेह विकसित होने में सहायता देना है आत्म संतोष और संरक्षण प्राप्त करने में सहयोग करना शिक्षा का उद्देश्य बालक की मूल प्रवृत्तियों और स्वाभाविक गुणों का विकास करना है इसके अलावा शिक्षा का उद्देश्य बालों को आरक्षण संतोष प्राप्त करने में सहायता देना है व्यक्तित्व विकास मानव व्यक्तित्व का स्वतंत्र विकास शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है जो शिक्षा विकास में सहायक हो वही वास्तविक शिक्षा है जातियों का संरक्षण शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य सामाजिक अथवा जाति विरासत के रूप में मिली हुई संस्कृति को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचा का संरक्षण करना है मानव का एक कुशल यंत्र की भांति काम करना यंत्र वादियों के अनुसार विश्व एक विराट यंत्र तथा मानव इसका एक भाग भी है तथा स्वयं अपने पूरे भैया शिक्षा का उद्देश्य मानव व्यवहार को इस प्रकार विकसित करना है जिससे वह एक कुशल यंत्र की भांति कार्य कर सकें ।

 प्रकृतिवाद तथा पाठ्यक्रम प्रकृति वादी बालक को पाठ्यक्रम का आधार मानते हैं वे कहते हैं कि पाठ्यक्रम ऐसा बनाया जाए जो बालक के विकास की विभिन्न अवस्थाओं की आवश्यकता है पूरी कर सके कामिनी यस के अनुसार पार्टी विषयों में से कुछ विषय बालक को पढ़ाने के लिए चुने जाएं रसके के अनुसार का मेनियस का उद्देश्य सब मनुष्यों को सब विषय पर आना था वह सब विषयों में से कुछ को चुनना आवश्यक नहीं समझता था इस परिसर के अनुसार स्पेंसर ने मानव क्रियाओं को पांच भागों में बांट कर उनके अनुसार उनसे संबंधित विषय अगर बताए हैं मानव क्रियाएं आत्म संरक्षण विषय शरीर विज्ञान स्वास्थ्य विज्ञान मानव क्रिया जीवन की आवश्यकता विषय भौतिक विज्ञान गणित भूगोल मानव प्रिया संतान के पालन पोषण संबंधी विषय गृह शास्त्र शरीर विज्ञान तथा बाल मनोविज्ञान मानव क्रिया सामाजिक एवं राजनीतिक संबंधों की स्थापना विषय इतिहास अर्थशास्त्र समाजशास्त्र आदि मानव क्रिया संस्कृति संबंधी विषय कला भाषा साहित्य हक्सले के अनुसार हक्सले अन्य प्रकृति वादियों के समान विज्ञान के अध्ययन पर बल नहीं देता है वह विज्ञान की वजह सांस्कृतिक पहलू को अधिक महत्व देता है

प्रकृतिवाद और शिक्षण विधियां
प्रकृति वादी बालक को ही समस्त शिक्षा प्रणाली का केंद्र बिंदु मानते हैं प्रकृतिवाद ने जिन नवीन शिक्षण विधियों को जन्म दिया उनमें से प्रमुख है -

(1) करके सीखना (2) अनुभव द्वारा सीखना (3) खेल द्वारा सीखना (4) जूरिस्टिक पद्धति (5) डाल्टन पद्धति (6) मांटेसरी पद्धति (7) निरीक्षण पद्धति (8) प्रत्यक्ष पद्धति

 यथार्थवाद यथार्थवादी दर्शन के अनुसार इंद्रियों के द्वारा प्राप्त ज्ञान ही सत्य है यथार्थवादी दर्शन जीवन की सभी समस्याओं का को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखता है यथार्थवादी दर्शन आदर्शवादी विचारों का विरोध करता है यथार्थवाद का अर्थ यथार्थवाद शब्द अंग्रेजी भाषा के रियलिज्म का समानार्थी है रियल शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के रेस शब्द से हुई है जिसका अर्थ है वस्तु अतः रियली में शब्द का शाब्दिक अर्थ हुआ वस्तु संबंधी विचारधारा यथार्थवाद जीवन की यथार्थता में विश्वास रखता है और भौतिक स्थिति उसका क्रिया क्षेत्र है इस दृष्टि से यथार्थवाद भौतिकवाद पर आधारित है यथार्थवाद की परिभाषाएं राशि के अनुसार जो कुछ हम प्रत्यक्ष में अनुभव करते हैं उनके पीछे तथा उन से मिलता-जुलता वस्तुओं का एक यथार्थ जगत है कांटे हुई गुड के अनुसार यथार्थवाद व सिद्धांत है जिसके अनुसार वस्तु गत यथार्थता या भौतिक जगत चेतन मन से स्वतंत्र रूप में स्थित रखता है उसकी प्रकृति और उसके गुण उसके ध्यान से मालूम होते हैं यथार्थवाद के मूल तत्व यथार्थवाद की तत्व मीमांसा यथार्थवादी पदार्थ और जगत को अंतिम सप्ताह मानते हैं परंतु जगत और वस्तुओं का विवेचन भिन्न-भिन्न प्रकार से किया गया है इसलिए इसे बहू आदि दर्शन भी कहते हैं यथार्थवाद की ज्ञान मीमांसा यथार्थवादी वस्तुओं तथा चेतना दोनों को ही महत्व देते हैं यह भी ज्ञान की प्रक्रिया में गया था एवं गिरे को महत्व देते हैं ज्ञान के स्रोत ज्ञानेंद्रियां तथा कर्म इंद्रियां हैं इनसे प्राप्त ज्ञान ही सच्चा ज्ञान माना जाता है यथार्थवाद की मूल्य मीमांसा यथार्थवादी इस भौतिक संसार को ही सत्य मानते हैं इनके अनुसार अपने जीवन की रक्षा और सुख पूर्वक जीवन जीना ही मनुष्य जीवन का उद्देश्य है मनुष्य को वही कार्य करने चाहिए जिनसे उन्हें उसे सुख की अनुभूति हो यथार्थवाद के रूप यथार्थवादी विचारधारा के रूप देखने को मिलते हैं मानवतावादी यथार्थवाद मानवतावादी यथार्थवाद के अनुसार मनुष्य को जीवन में सुख और समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है इस विचारधारा के विकास में निम्न प्रतिनिधियों ने विशेष प्रकाश डाला है 1446 से 1536 हालैंड निवासी ईर्ष्या का प्रतिपादन किया संकुचित दृष्टिकोण और जीवन से संबंधित शिक्षा का घोर विरोधी था क्रिसमस की दो पुस्तकें सिस्टम आफ स्टडीज और 60 विशेष प्रसिद्ध है रेबल a83 1553 निवासी नवीन विचारों से उपस्थित की शिक्षा प्रणाली का विरोध किया तथा उधार शिक्षा का प्रतिपादन किया उन्होंने धार्मिक सामाजिक और शारीरिक शिक्षा पर बल दिया उनके अनुसार बालकों की शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो जीवन की समस्याओं को हल करने में सहायक हो सके मिल्टन मिल्टन एक साहित्यकार दार्शनिक शिक्षा शास्त्री थे अपनी पुस्तक एजुकेशन में उन्होंने शिक्षा संबंधी विचारों को प्रकट किया है एक नई परिभाषा प्रस्तुत की है उनके अनुसार शिक्षा वही है जो व्यक्ति को शांति सार्वजनिक एवं व्यक्तिगत उदारता के साथ योग्य बना देती है बालकों को शिक्षा के स्थान पर वास्तविक वस्तुओं का ज्ञान कराना अधिक आवश्यक बताया सामाजिक यथार्थवाद सामाजिक यथार्थवाद शिक्षा अनुभव को अधिक महत्व देता है इस प्रकार की शिक्षा का उद्देश्य जीवन को सफल और सुखी बनाना है इसका प्रमुख समर्थन में विचारों को ने किया माउंटेन लॉर्ड माउंटेन

यथार्थवाद व शिक्षा के उद्देश्य इस विचारधारा के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य जीवन की वास्तविकता की शिक्षा देना है यथार्थवाद का मुख्य उद्देश्य शिक्षक द्वारा अनुशासन स्थापित करना एवं शिष्यों को सक्रिय बनाना है तथा उनके भौतिक मानसिक सामाजिक एवं नैतिक विकास को प्राप्त करना है यथार्थ वादियों के अनुसार शिक्षा के उद्देश्य हैं वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक दृष्टिकोण का विकास करना है शिक्षा का उद्देश्य बालकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना होता है इंद्रियों का विकास करना यथार्थ वादियों के अनुसार ज्ञान को अनुभव द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है अतः ज्ञानेंद्रियों का विकास हुआ उनका प्रशिक्षण शिक्षा का उद्देश्य होना चाहिए बालक को एक सफल एवं सुखी जीवन के लिए तैयार करना मनुष्य एक सफल एवं सुखी जीवन व्यतीत कर सकता है अतः अभी शिक्षा का एक मुख्य उद्देश्य है बालक को प्राकृतिक व सामाजिक पर्यावरण का ज्ञान कराना शिक्षा का उद्देश्य बालों को प्राकृतिक व सामाजिक पर्यावरण का ज्ञान कराना भी होता है वास्तविक जीवन के लिए तैयार करना यथार्थ वादियों के अनुसार ही यथार्थ है इसकी वास्तविकता से अवगत कराना चाहिए के अनुसार कोई भी व्यक्ति किसी व्यवसाय शिक्षा और व्यवसाय का चयन करें मानसिक शक्तियों का विकास करना शिक्षकों की मानसिक शक्तियों का विकास करें अपने जीवन में सुख एवं सफल जीवन यथार्थवाद पाठ्यक्रम यथार्थ वादियों के अनुसार बालक को व्यापक पाठ्यक्रम में से अपनी योग्यताओं के अनुसार विषयों का चुनाव करने की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए पाठ्यक्रम के विषय पर संबंधित होने चाहिए आरती शिक्षा के पाठ्यक्रम में स्थान दे

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