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शनिवार, 28 दिसंबर 2019

मेरी समसामयिक रचनाएँ



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*अतिथि अछूतो भवः* (नयी रचना) 23/12/2019

ऐ ब्राह्मण !
तुम कहते हो
" अतिथि देवो भवः ।"
किन्तु मानते नहीं;
यदि मानते, तो उस दिन
जब मैं तुम्हारे घर गया था
तुम्हारे बुलाने पर
तुमसे मिलने,
जेठ की दोपहरी में
साइकिल चलाकर दस मील तक
पसीने से लथपथ;
तो तुम्हारा युवा पुत्र जाति नहीं पूछता
ना ही लाया होता मेरे लिए
लोटे में पानी और गुड़ हाथ पर
ना ही पिलाया होता मुझे ऊपर से पानी
मैं चाहता, तो कह देता - " मुझे प्यास नहीं है । "
किन्तु मूक ही बना रहा
जानते हो क्यों ?
क्योंकि मुझे चाहिए था साक्ष्य
तुम्हारे छुआछूत के अपराध का
ताकि मैं सिद्ध कर सकूँ
लोक न्यायालय में इस बात को
कि तुम अतिथि-सत्कार जाति पूछकर करते हो
और दलितों के लिए
तुम्हारी एक ही है कूक्ति -
" अतिथि अछूतो भवः । "

✍️ *देवचंद्र भारती 'प्रखर'*

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*कविता* (25/12/2019) *मनुस्मृति_दहन_दिवस* 

मनुस्मृति का दहन हम करेंगे
करते रहेंगे
यूँ ही हर वर्ष


©️✍️  *देवचंद्र भारती 'प्रखर'*

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* क्या नव वर्ष आ गया ?* (नयी रचना) 01/01/2020

क्या नववर्ष आ गया ?
किधर है ?
कहां गया ?
प्रतीक्षा मैं कर रहा हूँ
वर्षों से;
सुना हूँ कि जब भी कभी
नव वर्ष आता है
साथ में नवीनता का
संदूक लाता है,
उसमें भरी होती हैं -
मिश्रित मिठाईयाँ;
समता की बर्फी
स्वतंत्रता का लड्डू
प्रेम का गुलाबजामुन
छेना बंधुत्व का
न्याय का पेड़ा;
मैं इन मिठाइयों को
खाना चाहता हूँ
खिलाना चाहता हूँ
रूठे नव वर्ष को
मनाना चाहता हूँ ।

©️✍️  *देवचंद्र भारती 'प्रखर'*

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कुत्ते भी भक्ति करते हैं 14/01/2020

मैंने बचपन में एक कुत्ता पाला था
मुझे अच्छी तरह याद है
वह हर बुधवार को
उपवास रखता था
वह शाकाहारी था
मांस सूँघकर पीछे हट जाता था
मेरी माँ कहती थी
"यह पिछले जन्म में ब्राह्मण था ।"
किंतु यह चमार के घर क्यों जन्मा ?
यह सवाल मैंने कभी नहीं पूछा
बचपन में
अपनी माँ से;
अब तो पूछने की जरूरत नहीं
मैं जान चुका हूँ
पूर्व जन्म मिथ्या है
किंतु एक बात सत्य है
मैं तब भी मानता था
और अब भी मानता हूँ
कि कुत्ते भी भक्ति करते हैं
इसीलिए अब मैं
भक्तों से सावधान रहता हूँ


©️✍️ *देवचंद्र भारती 'प्रखर'*


*भ्रम और सत्य* 17/01/2020

तुमने क्या सोचा था ?
कि मृत्युदंड से तुम बच जाओगे ?
तुमने अस्मत लूटी है भारत के कन्या की
हत्या की है तुमने उसके स्वतंत्रता की
भारतीय संविधान तुम्हें क्षमा नहीं करेगा
बोल दो अपनी माँ से
पूजा-पाठ हरिकीर्तन में
व्रत और वंदना में उर्जा नष्ट ना करें
अपने पिता से कह दो
ज्योतिष का बोझ पटक दें
तीर्थों का भ्रमण किसी काम नहीं आएगा
तुम भी हनुमान चालीसा पढ़ना छोड़ दो
क्योंकि सारे कर्मकांड निष्फल हो जाएंगे
तुम्हारे मृत्युदंड का आदेश हो चुका है
विश्व की कोई भी शक्ति
तुम्हें बचा नहीं सकती
मरने से पहले तुम भी
इस सत्य को स्वीकार कर लो
ईश्वर के भ्रम से मुक्त हो जाओ

 ©️✍️ *देवचंद्र भारती 'प्रखर'*

*मैं रोहित वेमुला नहीं* 19/01/2020

वह कायर था
जो तुम्हारे जुल्म को सहता रहा
उसकी सिर्फ जुबान ही मजबूत थी
दिल - दिमाग उसके कमजोर थे
वह नाम का जवान था
शोधछात्र भी था सिर्फ नाम का
उसमें बुद्ध जैसा नहीं बोध था
अंबेडकर जैसा नहीं प्रतिरोध था
वह हार गया था अपने आप से
वह था कुण्ठाग्रस्त
उसने आत्महत्या की
किंतु मैं वह रोहित वेमुला नहीं
सावधान !
मैं उसकी जड़ों को झकझोर दूँगा
तोड़ दूँगा मैं उसकी टहनियों को
तुमने लगाया है जो बरगद -
शोषण और भ्रष्टाचार का
मैं अकारण हिंसा नहीं करता हूँ
किंतु आत्मरक्षा हेतु
यदि तुम्हारी हत्या भी करनी पड़े
याद रखो
मेरे हाथ कभी काँपेंगे नहीं

©️✍️  *देवचंद्र भारती 'प्रखर'*

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