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सोमवार, 2 दिसंबर 2019

पाश्चात्य काव्यशास्त्र (सामान्य अध्ययन)






पाश्चात्य काव्यशास्त्र

*पाश्चात्य काव्य चिंतन का आरंभ यूनान में हुआ।
*यूनान के प्रथम महाकवि होमर की दो महाकाव्य कृतियां है - इलियड और ओडेसी ।
* होमर का समय ईसा पूर्व नवी शताब्दी माना जाता है ।
* होमर के उपरांत हैसियड की रचनाएं प्राप्त होती हैं ।
*हैसियड का समय ईसा पूर्व आठवीं शताब्दी माना जाता है ।
*हैसियड की सुप्रसिद्ध रचना त्याग होनी है ।
* यूनानी साहित्य के अंतर्गत 'पिण्डार' का नाम महान गीतिकार के रूप में सुप्रसिद्ध है ।
*इनका समय छठवीं शताब्दी ईसा पूर्व का उत्तरार्ध और पांचवी सतीश शत्रु के पूर्वार्ध के बीच माना जाता है ।
*इनकी सुविख्यात कृति इपीनिका है ।
* पांचवी सदी ईसा पूर्व के लगभग अलंकार शास्त्र (रिटैरिक्स) का प्रचार आरंभ हुआ । 'सोफिस्ट' को पहला अलंकार शास्त्री कहा जाता है ।
* परवर्ती विचारकों में अरिस्टोफनीज़ का विशेष महत्व है । इसका समय 445 ईसा पूर्व से लेकर 385 ईसा पूर्व तक माना जाता है । अरिस्टोफनीज़ एक मनोविनोदी और व्यंग्य लेखक था । इन्होंने 54 हास्य नाटक लिखे जिनमें केवल 19 प्राप्त होते हैं ।
* सुकरात के काव्यशास्त्र संबंधी कई विचार मिलते हैं । उनका विश्वास था कि शिक्षा सद्गुणों का विकास करती है । उनकी आदर्श राज्य की कल्पना सुप्रसिद्ध है । सुकरात का समय 469 ईसा पूर्व से 399 ईसा पूर्व तक माना जाता है ।
*प्लेटो सुकरात के प्राण दंड के पश्चात व्यवहारिक राजनीति छोड़कर राजनीतिक दर्शन की ओर मुड़े । उनका ग्रंथ 'रिपब्लिक' राजनीतिक चिंतन और आदर्श राज्य का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है । प्लेटो का जन्म ईसा पूर्व 427 में  हुआ था । ईसा पूर्व 387 में प्लेटो ने एथेंस में एक अकादमी की स्थापना की । 40 वर्षों तक प्लेटो अकादमी में ज्ञान विज्ञान के अध्ययन अध्यापन का संचालन करते रहे । प्लेटो की मृत्यु  347 ईसा पूर्व में एक वैवाहिक भोज के समय हुई । प्लेटो के कुल 36 ग्रंथ माने जाते हैं, जिनमें 23 संवाद और 13 आलेख हैं । इनमें पोलिटिया (दी रिपब्लिक) और नोमोइ (लाॅज) अधिक महत्वपूर्ण है । प्लेटो देवी प्रेरणा पर विश्वास करते थे । प्लेटो कला को अनुकृति मानते हैं । प्लेटो की मान्यता है कि कवि या कलाकार का चित्रण वास्तविकता और सत्य से तिगुना दूर होता है, क्योंकि यह वास्तविक सत्य की अनुकृति की अनुकृति है । प्लेटो संगीत को बड़ा महत्व देते हैं ।
* आइसोक्रेटिक प्लेटो और अरस्तू के समकालीन प्रसिद्ध शिक्षा शास्त्री था, परंतु यह प्लेटो के काल्पनिक आदर्शवाद के सिद्धांत से सहमत नहीं था । इनका समय ईसा पूर्व 436 से 338 तक था ।
*इस किलर्स प्लेटो के पूर्व यूनान के प्राचीन दार्शनिक और नाटक कारों में इस क्लास का महत्वपूर्ण स्थान है । इनका समय ईसा पूर्व 525 से 456 तक माना जाता है । इसकी लस प्रसिद्ध गीतकार पिंड आर के भी संपर्क में रहा तथा अपने दुखांतक नाटकों से सोफों प्लीज तथा अन्य यूनानी नाटककारों को प्रभावित भी किया । यह एक सफल नाटककार था । इसकी 80 कृतियां कही जाती हैं, जिनमें 52 पुरस्कृत हुई थी । इसे विषादांत नाटकों का जनक भी कहा जाता है । इसने नाटकों में नई शिल्प विधि भी विकसित की थी । इसने अपने साहित्य से इटालियन फ्रेंच और अंग्रेज कवियों और लेखकों को भी प्रभावित किया था ।
*अरस्तु यूरोपियन चिंतन और पाश्चात्य व्यवस्थित विचारधारा के आदि प्रवर्तक यथार्थवादी दार्शनिक तथा व्यापक ज्ञान के विश्वकोश अरस्तु ईसा पूर्व 384 में उत्तरी यूनान के मसीह दुनिया में स्थित यूनानी बस्ती के रस में उत्पन्न हुए थे । उनके पिता निको मकदूनिया के राजा तथा सिकंदर महान के पिता द्वितीय के राजचिकित्सक थे । चिकित्सक के पुत्र होने के नाते 200 वर्ष पूर्व से प्रचलित चिकित्सा विज्ञान के जन्मजात उत्तराधिकारी हुए । पिता की मृत्यु के उपरांत ईसा पूर्व 367 में अरस्तु प्लेटो की अकादमी में भेजे गए, जहां 20 वर्षों तक नेताओं के संपर्क में रहें तथा उनके पशुओं की विचारधारा का गहरा प्रभाव पड़ा । ईसा पूर्व 347 में प्लेटो की मृत्यु के उपरांत वस्तु को अकादमी का अध्यक्ष बनने की आशा थी इसके विपरीत के भतीजे को अध्यक्ष बनाया गया । वे एथेन्स छोड़कर चले गए और 'ऐसस' में नयी अकादमी स्थापित की । वहीं पर अरस्तु ने 'पोलिटिका' ग्रंथ की रचना की । 37 वर्ष की अवस्था में अरस्तु ने वहां के राजा की भतीजी 'पाइथियास' से विवाह किया । 42 वर्ष की अवस्था में मैसिडोन के राजा फिलिप द्वितीय ने अरस्तु को अपने 13 वर्षीय पुत्र शिक्षक बनने के लिए आमंत्रित किया, जो सिकंदर महान के रूप में प्रसिद्ध हुआ । अरस्तु ने 47 ग्रंथ लिखे और उनका देहांत 63 वर्ष की अवस्था में ईसा पूर्व 321 में हुआ ।

*लांजाइनस यूनान के एक महान विचारक और काली शास्त्री माने जाते हैं । इनका समय ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी माना जाता है । लांजाइनस के समय में लोग नवीनता और चमत्कार के प्रदर्शन का भी में अधिक करने लगे थे । अतः उस प्रवृत्ति के विरोध में इन्होंने काव्य में एक नवीन तत्व का प्रतिपादन किया जो है उदात्त तत्व । अपने ग्रंथ पेरीअप्सिस आंधी सप्लाई में उन्होंने उदात्त का विस्तृत विवेचन किया है । उनकी इस पुस्तक का केवल दो तिहाई भाग ही उपलब्ध है । इसमें इन्होंने दो भागों में अपने सिद्धांत को स्पष्ट किया है । प्रथम भाग में उदास शैली का विवेचन है और द्वितीय भाग में कला के आधारभूत तत्वों पर प्रकाश डाला गया है ।

* हॉरेस इटली के सुप्रसिद्ध काले शास्त्री और महापुरुष थे । इनका जन्म दक्षिण इटली के वेणुसिया नगर में 8 दिसंबर 65 इसा पूर्व में हुआ था । इनका पूरा नाम क्विंटल और एसीएस फ्लेक्स था और ऐसी अस इनके पिता का नाम था और क्विंटल इनका निजी नाम परंतु आगे चलकर यह हरीश के नाम से विख्यात हुए । इनकी पिता यद्यपि एक कृषि फार्म में काम करते थे परंतु अपने पुत्र को अच्छी सी अच्छी शिक्षा दिलाने की उनकी महत्वाकांक्षा थी अतः उन्होंने 6 वर्ष तक इनकी शिक्षा रूम में दिलाने के पश्चात 28 वर्ष की उम्र में यूनान के सहारे थैंक्स में भेज दिया वहां पर इन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और अपने पिता की आकांक्षाओं को पूरा किया तथा रोम वापस लौट आए । रोम के गृह युद्ध में इन्होंने जूलियस सीजर के विरुद्ध ब्लूटूथ का साथ दिया । पिता की मृत्यु और संपत्ति नष्ट हो जाने पर हो रहे साहित्य की ओर झुके और समकालीन परिस्थितियों के कारण इन्होंने व्यंग का धर्म नीति और अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाई । इससे इनके सत्र बढ़ गया परंतु इसके गीतिकाव्य ने जिस में अप्रतिम काव्य सौंदर्य और होमवर्क क्षेत्र की जनता को मूंद कर लिया । 26 नवंबर को हरीश का देहावसान हो गया । उनकी पुस्तक आज कोई टीका में उनके काव्य कला और काव्य शास्त्र से संबंधित विचार प्राप्त होते हैं । इसका वैसा ही उद्देश्य है जैसा केशवदास की रामचंद्रिका तथा कभी प्रिया का है ।

* वाल्टेयर का वास्तविक नाम फ्रांसिस मेरी एरो एक था पर इन्होंने वाल्टेयर नाम से ही लिखना शुरु किया इनका जन्म पेरिस में सन 1694 की 21 नवंबर को हुआ था तथा इनकी मृत्यु 30 मई 1778 में 83 वर्ष 6 माह की आयु भोग कर हुई थी अपने लेखन और विचारों के कारण में दो-तीन बार कारावास में रहना पड़ा उन्होंने काफी समय व्यतीत किया और 1 की छाती बड़ी  किया और वहीं इनकी ख्याति बड़ी सन 1760 के बाद यह प्रायर स्विजरलैंड में रहे जहां इन्होंने घड़ियों और रेशम की व्यापार से पर्याप्त धन अर्जित किया और उससे जरूरतमंद पीड़ित और निर्धन लोगों की सहायता की इन्होंने नाटक दर्शन व्यंग्य कथा तथा काव्यशास्त्र की रचनाएं लिखी इन्होंने बंधी बधाई परंपराओं का विरोध किया उनकी साहित्यिक अभिरुचि के निर्माण में अंग्रेजी साहित्य का विशेष महत्व है वह परिवर्तन के पाती थी पर सुंदर शास्त्री कोई निश्चित सिद्धांत भी नहीं दे सके उनका दृष्टिकोण व्यक्तिवादी था ।

* रूसो का जन्म स्विजरलैंड की जिनेवा नगर में सन 17 से 12 ईसवी में हुआ था बचपन में ही माता की मृत्यु के पश्चात और पिता के अन्यत्र चले जाने पर इनका पालन पोषण संबंधी उन्होंने किया यह घुमक्कड़ थे जब सन 18 से 41 ईसवी में फ्रांस है तो वहां के निवासियों के बनावटी जीवन से उन्हें बढ़ा हुआ वशिष्ठ धनी मानी नागरिकों को विशेष सुविधाएं थी जबकि सामान्य जन उपस्थित थे इस विषय पर 1762 इसमें उन्होंने ले कांट्रैक्ट सोशियल नामक पुस्तक लिखी जिसका मुख्य सूत्र था कि बिना लोग स्वीकृति के कोई कानून उन पर लागू नहीं हो सकता यह पुस्तक ही फ्रांस की क्रांति की प्रेरक सिद्ध हुई जिसका नारा था स्वतंत्रता समानता और भाईचारा रूसो ने और भी बिचारपुर साहित्य लिखा जिसने लोगों का दृष्टिकोण और व्यवहार ही बदल दिया साहित्य के क्षेत्र में भी रूसो के विचार महत्वपूर्ण हैं अपने विचारों के कारण वे स्वच्छंदतावाद आंदोलन के जनक माने जाते हैं उनका विचार था कि प्रकृति के सौंदर्य को काव्य में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाना चाहिए उन्होंने अपनी निजी भावनाओं को तीव्रता के साथ व्यक्त किया उनके कन्फेशंस आत्म निवेदन उत्कृष्ट रचना माने जाते हैं अपने स्वतंत्र धार्मिक विचारों के कारण उनका दमन किया गया वेसन 1762 ईसवी में फ्रांस छोड़कर चले गए और फिर वापस आने पर पेरिस के निकट 2 जुलाई 1778 ईस्वी में उनका देहावसान हो गया पर उनके विचार समाज और साहित्य में क्रांति फूंक दे रहे ।

* गुस्ताव फ्लावर वियर का समय सन 18 सो 21 से 18 सो 80 ईस्वी तक रहा इन्होंने अपने सुप्रसिद्ध उपन्यास मादाम बावरी द्वारा यथार्थवाद को एक नई व्याख्या दी उन्होंने साहित्य में जीवन की ऐसी परिस्थितियों तथा चरित्रों के व्यक्तित्व का ऐसा चित्रण किया जो स्वाभाविक ना होकर कृत्रिम और विशेष तथा उन्हें वह चित्रवाद का लेखक भी कहा जा सकता है इस प्रकार जीवन से पलायन कर जिस काल्पनिक जीवन का उन्होंने चित्रण किया वह वास्तविकता से भी नशा

* 400 हुआ ब्लेजर का जन्म 9 अप्रैल 1821 एसबीको हुआ उनके पिता बचपन में ही नहीं रहे 7 वर्ष की अवस्था में उनकी विधवा मां ने एक सैनिक राजनीतिज्ञ से विवाह कर लिया इस नए पिता से बाद लेयर का संघर्ष चलने लगा पिता के बताए मार्ग इन्हें नहीं रुचे पहले पिता से उत्तराधिकार में प्राप्त उधर भी 2 वर्षों में ही उड़ा डाला अपनी मां से प्राप्त पैसे घर पर ही गुजर बसर करने लगे पेरिस मैन के दिन बड़े कष्ट से बीते पर उसे ही इतना चाहते थे कि छोड़कर नेत्र कहीं नहीं जाना चाहते थे पेरिस की कलात्मक एवं साहित्यिक गतिविधियों में भाग लेते थे पर किसी के साथ मिल नहीं पाए और एकाकी जीवन व्यतीत करते 160 2557 फ्लावर्स नाम से प्रकाशित हुआ इससे परंपरावादी समुदाय में प्रकाशित हुए जिन्होंने आलेख तैयार किए थे पर कोई भी संग्रह के साथ प्रकाशित नहीं हो पाए वाद्य की मृत्यु 31 अगस्त 18 सो 67 में हो गई

* स्टीफेन मल्हार में का जन्म 18 मार्च सन 1842 को पेरिस में हुआ 5 वर्ष के बाद ही उनकी माता का देहांत हो गया और 21 वर्ष की अवस्था होने पर सन 18 सो 63 में वे अपने पिता की छत्रछाया से भी वंचित हो गए इन विषाद पूर्ण घटनाओं का प्रभाव उनकी कविता में भी देखा जा सकता है जिसके अंतर्गत हुए इस कठोर सांसारिक वस्तुओं के साथ से दूर एक नया संसार खोजते हैं उन्होंने लंदन जाकर अंग्रेजी सीखी और एक अध्यापक का जीवन व्यतीत करने लगे इसके साथ ही साथ पत्रकारिता संपादन और अनुवाद का कार्य भी उन्होंने किया जीविकोपार्जन के लिए इन सभी कार्यों के साथ उनकी काव्य रचना बराबर चलती रही आरंभिक काल से प्रभावित थी वास्तु प्लान कथा वाद्य से प्रभावित थे परंतु उनके स्थान पर उन्होंने अपनी नैतिकता के लिए कदर शुरू किया और ढूंढने का प्रयत्न किया उनके किसी वस्तु के वर्णन में 1 साल और पूर्णता का आभास मिलता है इसके लिए उन्हें एक नई भाषा का निर्माण करना पड़ा जिसके द्वारा विशिष्ट स्थान पर उसके पुरुषों का भाषा के स्वरूप को खोज निकालने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है इसके लिए उन्होंने अपने जीवन की मृत्यु 9 सितंबर 1898 ई में हुई

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स्टीफन मल्हार में 18 मार्च 1842 - 9 सितंबर 1898
बरग्सन हेनरी 1859 - 1941
बॉमगार्टन 1714 - 1762 तक
जीबी सोल्जर 1720 - 1779
मेंडल्सन 1729 - 1786
ले सिंह 1729 - 1781
हाइंस 1746 17 1804
हेमन 1730 - 1788
हार्ड 1744 - 1830
एनुअल कांड 1724 - 1804
गोएथे 1749 1732
हंबोल्ट 1767 - 1835
सी ल 1759 - 1805
फेंकते 1762 - 1814
सेलिंग 1775 - 5854
हेगेल 1770 - 1831
शॉपिंग होवर 1788 - 1807
फ्रेडरिक नीत्शे 1844 से 19
सौ हरिजन 1812 - 1870
शेरनी शेर की 88888
दो ब्लू 1836
सटासट 840 667 28 - 1910
इमर्शन 1803 से 1822
हेनरी डेविड थोरो 1768 - 8949
बेन जॉनसन 1573 - 1637
जान ब्राइडल 1631 17100
एडिशन 1672 - 1719
एलेग्जेंडर पोप 1688 1744
सैमुअल जॉनसन 1709 - 1784
विलियम हैजलिट 1778 से 830
ऑस्कर वाइल्ड
वर्ड्सवर्थ  1770 - 1850
कालरिज 1772 - 1834
बायरन 1788 - 1824
शेली 1792 - 1822
कीट्स 1795 - 1821
कार्ल मार्क्स 1818 - 1883
मैथ्यू आर्नल्ड 1822 - 1888
सिगमंड फ्रायड 1856 -1939
हाय ब्लॉक एलिस 1859 - 1939
क्रोचे 1866 - 1952
मैक्सिम गोर्की 1868 - 1936
व्लादीमीर इलीच 1870 - 1924
जुंग 1875 - 1961
लिओ ट्रांट्स्की 1879 - 1940
एजरा पाउण्ड 1885 - 1972
टी० एस० इलियट 1888 - 1965
जॉन क्रो रैनसम 1888 - 1974
हरबर्ट रीड 1893 - 1968
आई ए रिचर्ड्स 1893 - 1979
लीविस 1895 - 1978
एलेन टेट 1899 - 1979
काडवेल 1907 - 1937
क्रिकेट दर्द 1813 755
जस्पर्श 1383 - 1969
काफ्का प्रांजल 8324
ज्याँ पाल सात्र 1905 - 1980

होरेस का औचित्यवाद
लांजाइनस का उदात्तवाद
क्रोचे का अभिव्यंजनावाद
रिचर्ड्स का संप्रेषण सिद्धांत
इलियट का निर्वैयक्तिकता का सिद्धांत

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