संत रविदास की कविता में बौद्ध चिंतन






संत रविदास की कविता में बौद्ध चिंतन

अब मैं हार्यो रे भाई ।
थकित भयो सब हाल-चाल थैं, लोकन वेद बड़ाई ।।
थकित भयो गाइण अरु नाचण, थाकी सेवा पूजा ।
काम क्रोध थै देह थकित भई, कहूं कहां लो दूजा ।।
राम जन होऊँ ना भगत कहाऊँ, चरण पषालूं न देवा ।
जोई जोई करूं उलटि मोही बांधे, ताथे निकट न भेवा ।।पहली ज्ञान का किया चांदना, पीछे दीया बुझाई ।
सुन्न सहज में दोऊ त्यागे, राम कहूँ न खुदाई ।।
हरै बसे खटक्रम सकल अरू, दूरिब कीन्हें सेऊ ।
ज्ञान ध्यान दोउ दूरी कीए, दूरिब छाड़ि तेऊ ।।
पंचू थकित भए जहां-तहां, जहां-तहां थिति पाई ।
जा कारण में दौरो फिरतो, सो अब घट में पाई ।।
पंचू मेरी सखी सहेली, तिन निधि दई बताई ।
अब मन फूलि भयो जग महिया, उलटि आपो में समाई ।।
चलत-चलत मेरो निजमन थाकौ, अब मोपै चलो न जाई ।
सोई सहज मिलो सोइ सन्मुख, कहै रैदास बताई ।।

अर्थ -
संत रविदास जी कहते हैं कि अब मैं हार चुका हूं । लोक-वेद की बढ़ाई करके, दोनों तरह से (हाल-चाल) थक चुका हूं । नाचते-गाते और सेवा-पूजा करके भी थक चुका हूं । काम क्रोध से शरीर थक चुकी है; और दूसरी बात क्या कहूं । अब तो मैं न ही रामजन हो पाता हूं, न हीं भक्तजन हो पाता हूं और न ही देवताओं के पैर पखारता हूं । मैं जो-जो भी करता हूं, उससे और भी सांसारिक बंधनों में बँधता जाता हूँ । पहले तो मैं ज्ञान का दीपक जलाया फिर उसे बुझा दिया । सुन्न सहज (शून्य साधना) में मैंने दोनों को छोड़ दिया । अब मैं न हीं राम कहता हूं, न हीं खुदा कहता हूँ । मैंने ज्ञान-ध्यान (पूजा-पाठ) दोनों छोड़ दिया है । अब तक मैं जिसके लिए दौड़ता फिरता था, मैंने उसे अपने ही भीतर पा लिया है । अब मेरी पांचों इंद्रियां सहेली बन गई है । उन्होंने मुझे असली निधि को बता दिया है । अब मैं इस संसार में रहकर ही प्रसन्न रहता हूं और अब *वह (परम सत्य) भी मेरे अंदर समा गया है । संत रविदास जी कहते हैं कि अब *वह (परम सत्य) मुझे सहज रूप में सम्मुख दिखाई देता है ।

विशेष संत रविदास जी ने सोहम् (स: + अहम् ) अर्थात् 'वह से मैं की ओर', बाहर से भीतर की ओर' के साधना-रूप को स्वीकार किया । इस प्रकार की साधना तथागत गौतम बुद्ध के शून्य-वाद के निकट है ।

https://www.dhammasahitya.in/2019/07/blog-post_17.html?m=1

🖋..................देवचंद्र भारती 'प्रखर'
हिंदी प्रवक्ता - शहीद कैप्टन विजय प्रताप सिंह महाविद्यालय, आवाजापुर, चंदौली, उत्तर प्रदेश

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