हिंदी के दलित साहित्यकार



1. डॉक्टर भीमराव अंबेडकर 


भारतीय संविधान के निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल सन 1891 में इंदौर जिला के महू नगर के सैन्य छावनी में हुआ था । इनके पिता जी का नाम  रामजी राव तथा माता जी का नाम भीमाबाई था । भीमराव अपने माता - पिता की  चौदहवीं संतान थे । अंबेडकर जी के बड़े भाई का नाम आनंद राव था । सन 1907 में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद 1909 में इंटरमीडिएट, 1912 में स्नातक तथा सन् 1915 में परास्नातक की उपाधि प्राप्त करके भीमराव अंबेडकर समाजिक कार्यों में लग गए । उन्होंने अपने समाज की स्थिति सुधारने के लिए चिंतन मनन करना आरंभ कर दिया । डॉ अंबेडकर ने 14 अक्टूबर सन 1956 में बौद्ध धर्म की दीक्षा ग्रहण करके अपने साथ लाखों अनुयायियों को भी बौद्ध धर्म ग्रहण करवाया । 6 दिसंबर सन 1956 को इस भारत के सच्चे सपूत का देहांत हो गया ।

रचनाएं 

अछूत कौन और कैसे ? 
जाति भेद का उच्छेद 
बुद्ध और उनका धम्म

👉 डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की संपूर्ण जीवनी जानने के लिए इस लिंक को खोलें 👇

https://www.dhammasahitya.in/2019/08/blog-post_10.html?m=1

📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖

2. धर्मवीर भारती 

धर्मवीर भारती जी का जन्म 25 दिसंबर सन् 1926 को इलाहाबाद के अतरसुइया मुहल्ले में हुआ । उनके पिता का नाम श्री चिरंजीव लाल वर्मा और माँ का श्रीमती चंदादेवी था । स्कूली शिक्षा डी. ए वी हाई स्कूल में हुई और उच्च शिक्षा  प्रयाग विश्वविद्यालय में । प्रथम श्रेणी में एम ए करने के बाद  डॉ धीरेंद्र वर्मा के निर्देशन में सिद्ध साहित्य पर शोध-प्रबंध लिखकर उन्होंने पी-एच०डी० प्राप्त की ।
घर और स्कूल से प्राप्त आर्यसमाजी संस्कार, इलाहाबाद और विश्वविद्यालय का साहित्यिक वातावरण, देश भर में होने वाली राजनैतिक हलचलें, बाल्यावस्था में ही पिता की मृत्यु और उससे उत्पन्न आर्थिक संकट इन सबने उन्हें अतिसंवेदनशील, तर्कशील बना दिया । उन्हें जीवन में दो ही शौक थे : अध्ययन और यात्रा । 

भारती के साहित्य में उनके विशद अध्ययन और यात्रा-अनुभवोंं का प्रभाव स्पष्ट देखा जा सकता है -
जानने की प्रक्रिया में होने और जीने की प्रक्रिया में जानने वाला मिजाज़ जिन लोगों का है उनमें मैं अपने को पाता हूँ । (ठेले पर हिमालय)

उन्हें आर्यसमाज की चिंतन और तर्कशैली भी प्रभावित करती है और रामायण, महाभारत और  श्रीमद्भागवत । शरद्चंद्र का साहित्य उन्हें विशेष प्रिय था । आर्थिक विकास के लिए  मार्क्स के सिद्धांत उनके आदर्श थे परंतु मार्क्सवादियों की अधीरता और मताग्रहता उन्हें अप्रिय थे । 'सिद्ध साहित्य' उनके शोध का विषय था, उनके सहजिया सिद्धांत से वे विशेष रूप से प्रभावित थे । पश्चिमी साहित्यकारों में शीले और आस्करवाइल्ड उन्हें विशेष प्रिय थे । भारती को फूलों का बेहद शौक था । उनके साहित्य में भी फूलों से संबंधित बिंब प्रचुरमात्रा में मिलते हैं ।
आलोचकों ने भारती जी को प्रेम और रोमांस का रचनाकार माना है । उनकी कविताओं, कहानियों और उपन्यासों में प्रेम और रोमांस का यह तत्व स्पष्ट रूप से मौजूद है । परंतु उसके साथ-साथ इतिहास और समकालीन स्थितियों पर भी उनकी पैनी दृष्टि रही है जिसके संकेत उनकी कविताओंं, कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, आलोचना तथा संपादकीयों में स्पष्ट देखे जा सकते हैं । उनकी कहानियों-उपन्यासों में मध्यवर्गीय जीवन के यथार्थ के चित्रा हैं ‘अंधा युग’ में स्वातंत्रयोत्तर भारत में आई मूल्यहीनता के प्रति चिंता है । उनका बल पूर्व और पश्चिम के मूल्यों, जीवन-शैली और मानसिकता के संतुलन पर है, वे न तो किसी एक का अंधा विरोध करते हैं न अंधा समर्थन, परंतु क्या स्वीकार करना और क्या त्यागना है ? इसके लिए व्यक्ति और समाज की प्रगति को ही आधार बनाना होगा -
पश्चिम का अंधानुकरण करने की कोई जरूरत नहीं है, पर पश्चिम के विरोध के नाम पर मध्यकाल में तिरस्कृत मूल्यों को भी अपनाने की जरूरत नहीं है ।

उनकी दृष्टि में वर्तमान को सुधारने और भविष्य को सुखमय बनाने के लिए आम जनता के दुःख दर्द को समझने और उसे दूर करने की आवश्यकता है । दुःख तो उन्हें इस बात का है कि आज ‘जनतंत्र‘ में ‘तंत्र‘ शक्तिशाली लोगों के हाथों में चला गया है और ‘जन’ की ओर किसी का ध्यान ही नहीं है । अपनी रचनाओं के माध्यम से इसी ‘जन’ की आशाओं, आकांक्षाओं, विवशताओं, कष्टों को अभिव्यक्ति देने का प्रयास उन्होंने किया है । धर्मवीर भारती जी का देहांत 4 सितंबर 1997 को हुआ ।
कार्यक्षेत्र : अध्यापन । 1948 में 'संगम' सम्पादक श्री  इलाचंद्र जोशी पादक नियुक्त हुए । दो वर्ष वहाँ काम करने के बाद हिंदुस्तानी अकादमी में नियुक्त हुए । सन् 1960 तक कार्य किया । प्रयाग विश्वविद्यालय में अध्यापन के दौरान 'हिंदी साहित्य कोश' के सम्पादन में सहयोग दिया । निकष' पत्रिका निकाली तथा 'आलोचना' का सम्पादन भी किया । उसके बाद 'धर्मयुग' में प्रधान सम्पादक पद पर बम्बई आ गये ।
1997 में डॉ॰ भारती ने अवकाश ग्रहण किया । 1999 में युवा कहानीकार  उदय प्रकाश के निर्देशन में साहित्य अकादमी दिल्ली के लिए डॉ॰ भारती पर एक वृत्त चित्र का निर्माण भी हुआ है ।
1972 में पद्मश्री से अलंकृत डा धर्मवीर भारती को अपने जीवन काल में अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए जिसमें से प्रमुख हैं
  • 1974 हल्दी घाटी श्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार
  • महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन 1988
  • सर्वश्रेष्ठ नाटककार पुरस्कार संगीत नाटक अकादमी दिल्ली 1989
  • भारत भारती पुरस्कार उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान 1990
  • महाराष्ट्र गौरव, महाराष्ट्र सरकार 1994
  • व्यास सम्मान, के. के. बिड़ला फाउंडेशन

  • कहानी संग्रह : मुर्दों का गाँव, स्वर्ग और पृथ्वी, चाँद और टूटे हुए लोग, बंद गली का आखिरी मकान, साँस की कलम से, समस्त कहानियाँ एक साथ
  • काव्य रचनाएं : ठंडा लोहा, सात गीत वर्ष, कनुप्रिया, सपना अभी भी, आद्यन्त
  • उपन्यास: गुनाहों का देवता, सूरज का सातवां घोड़ा, ग्यारह सपनों का देश, प्रारंभ व समापन
  • निबंध : ठेले पर हिमालय, पश्यंती
  • एकांकी व नाटक  : नदी प्यासी थी, नीली झील, आवाज़ का नीलाम आदि
  • पद्य नाटक :  अंधा युग
  • आलोचना : प्रगतिवाद : एक समीक्षा, मानव मूल्य और साहित्य

📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖

3. मलखान सिंह 

हिंदी दलित साहित्य के निर्माताओं में शुमार और दलित चेतना के मुखर सुविख्यात कवि मलखान सिंह का जन्म 30 सितंबर सन् 1948 को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गांव वसई काजी, जिला हाथरस (अलीगढ़) के दलित परिवार में हुआ । उच्च शिक्षा अलीगढ़ और आगरा से हुई मजदूर दिवस के हुए मजदूर दिवस के उपलक्ष्य में दो बार तिहार जेल गए । 1979 से 2008 तक बेसिक माध्यमिक शिक्षा विभाग में विभिन्न पदों पर कार्य किया ।

मलखान सिंह 'रिदम' पत्रिका और 'अंबेडकरवादी लेखक संघ' के सदस्य थे । कैंसर की बीमारी से ग्रसित होने के कारण 9 अगस्त सन् 2019 को इनका देहांत हो गया ।

कविता संग्रह 

सुनो ब्राह्मण 1996 
ज्वालामुखी के मुहाने

📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖

4. मोहनदास नैमिशराय




जन्म: 5 सितम्बर, 1949, मेरठ (उ.प्र.) । 

सुप्रसिद्ध दलित रचनाकार एवं मनीषी ।

पाँच वर्ष तक डॉ. आम्बेडकर प्रतिष्ठान, भारत सरकार, नई दिल्ली में सम्पादक एवं मुख्य सम्पादक । महात्मा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा एवं अन्य विश्वविद्यालयों में विजिटिंग प्रोफेसर । पत्रकारिता, रेडियो, दूरदर्शन, फिल्म, नाटक आदि में लेखन व प्रस्तुति का प्रचुर अनुभव । भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में अध्येता के रूप में ‘मराठी और हिन्दी दलित नाटक’ पर शोध ।

प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ

क्या मुझे खरीदोगे, मुक्तिपर्व, झलकारी बाई, जख्म हमारे, 
महानायक बाबा साहेब डॉ. आम्बेडकर (उपन्यास); 
आवाजें, हमारा जवाब (कहानी संग्रह); 
सफ़दर एक बयान, आग और आन्दोलन (कविता संग्रह); 
अपने अपने पिंजरे: 2 भागों में (आत्मकथा); 
अदालतनामा, हैलो कॉमरेड (नाटक); 
भारतरत्न डॉ. भीमराव आम्बेडकर, आत्मदाह संस्कृति: उद्भव और विकास, उजाले की ओर बढ़ते कदम, स्वतंत्रता संग्राम के दलित क्रान्तिकारी, बहुजन समाज (शोध व विमर्श); 
हिन्दुत्व का दर्शन, डॉ. आम्बेडकर और कश्मीर समस्या, भारत के अग्रणी समाज सुधारक (अनुवाद); 
दलित उत्पीड़न विशेषांक, हिन्दी दलित साहित्य (सम्पादन)

अनेक भारतीय और विदेशी विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में कई रचनाएँ शामिल । फिल्म, टी.वी. के लिए लेखन, रंगमंचीय अनुभव ।

सम्मान: डॉ. आम्बेडकर स्मृति पुरस्कार; डॉ. आम्बेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार; ‘कास्ट एंड रेस’ पुस्तक पर डॉ. आम्बेडकर इंटरनेशनल मिशन पुरस्कार कनाडा; गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार; डॉ. आम्बेड़कर सामाजिक विज्ञान संस्थान, महु (म.प्र.) के अलावा अन्य पुरस्कार ।

सम्प्रति: हिन्दी मासिक ‘बयान’ पत्रिका का सम्पादन ।

सम्पर्क: बी.जी. 5ए/30-बी, पश्चिम विहार, नई दिल्ली ।

📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖

5. ओमप्रकाश वाल्मीकि 



ओमप्रकाश वाल्मीकि का जन्‍म 30 जून सन् 1950 को मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) जिले के बरला गांव में एक अछूत वाल्‍मीकि परिवार में हुआ । उन्‍होंने अपनी शिक्षा अपने गांव और (देहरादून) से प्राप्‍त की । उनका बचपन सामाजिक एवं आर्थिक कठिनाइयों में बीता । आरंभिक जीवन में उन्हें जो आर्थिक, सामाजिक और मानसिक कष्ट झेलने पड़े उसकी उनके साहित्य में मुखर अभिव्यक्ति हुई है । वाल्मीकि कुछ समय तक महाराष्ट्र में रहे । वहाँ वे दलित लेखकों के संपर्क में आए और उनकी प्रेरणा से डॉ॰ भीमराव अंबेडकर की रचनाओं का अध्ययन किया । इससे उनकी रचना-दृष्टि में बुनियादी परिवर्तन हुआ । वे देहरादून स्थित आर्डिनेंस फॅक्टरी में एक अधिकारी के रूप में काम करते हुए अपने पद से सेवानिवृत्‍त हो गए ।
  • कविता संग्रह:- सदियों का संताप, बस्स ! बहुत हो चुका, अब और नहीं, शब्द झूठ नहीं बोलते, चयनित कविताएँ (डॉ॰ रामचंद्र)
  • कहानी संग्रह:- सलाम, घुसपैठिए, अम्‍मा एंड अदर स्‍टोरीज, छतरी
  • आत्मकथा:- जूठन (अनेक भाषाओँ में अनुवाद)
  • आलोचना:- दलित साहित्य का सौंदर्य शास्त्र, मुख्यधारा और दलित साहित्य, सफाई देवता
दलित साहित्य: अनुभव, संघर्ष एवं यथार्थ (2013) राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली
  • नाटक:- दो चेहरे, उसे वीर चक्र मिला था
  • अनुवाद:- सायरन का शहर (अरुण काले) कविता-संग्रह का मराठी से हिंदी में अनुवाद, मैं हिन्दू क्यों नहीं (कांचा एलैया) लो अंग्रेजी पुस्तक का हिंदी अनुवाद, लोकनाथ यशवंत की मराठी कविताओं का हिंदी अनुवाद
  • अन्य:- 60 से अधिक नाटकों में अभिनय, मंचन एवं निर्देशन, अनेक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सेमीनारों में भागीदारी

उन्हें सन् 1993 में डॉक्टर अंबेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार सन् 1995 में परिवेश सम्मान, न्यू इंडिया बुक पुरस्कार 2004, कथाक्रम सम्मान 2001, 8वां विश्व हिंदी सम्मलेन 2006 न्यूयोर्क, अमेरिका सम्मान और साहित्यभूषण पुरस्कार (2008-2009) से अलंकृत किया जा चुका है ।

📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖

6. जयप्रकाश कर्दम 




जयप्रकाश कर्दम एक हिन्दी साहित्यकार हैं । वह दलित साहित्य से जुड़े हैं । कविता, कहानी और उपन्यास लिखने के अलावा दलित समाज की वस्तुगत सच्चाइयों को सामने लानेवाली अनेक निबंध व शोध पुस्तकों की रचना व संपादन भी उन्होंने किया है ।

शिक्षा - एमए (दर्शनशास्त्र हिंदी इतिहास) पीएच.डी

दलित साहित्यकार जयप्रकाश कर्दम जी का जन्म उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में हुआ ।

रचनाएं 

उपन्यास -
छप्पर, करुणा

बाल उपन्यास - शमशान का रहस्य

कविता संग्रह  - गूंगा नहीं था मैं, तिनका तिनका आग

कहानी संग्रह - तलाश

शोध प्रबंध - श्रीलाल शुक्ल कृत राग दरबारी का समाजशास्त्रीय अध्ययन

दलित विमर्श - साहित्य के आईने में, बौद्ध धर्म के आधार स्तंभ, जर्मनी में दलित साहित्य, राहुल (खंडकाव्य)

संपादन - धर्मांतरण और दलित, जाति एक विमर्श, दलित साहित्य (वार्षिकी)

अनुवाद - चमार  (दि चमार्स का हिंदी अनुवाद)

पुरस्कार 

राष्ट्रपति द्वारा 2007 में पद्म भूषण मोटूरि सत्यनारायण पुरस्कार से सम्मानित ।


📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖

 7. कंवल भारती


जन्म - 4 फरवरी 1953 रामपुर उत्तर प्रदेश
भाषा - हिंदी 

विधाएं - कविता, आलोचना, विचार, अनुवाद, संवाद ।

कविता संग्रह - तब तुम्हारी निष्ठा क्या होती है ?

आलोचना - धम्म विजय विचार दलित विमर्श की भूमिका, दलित चिंतन में इस्लाम, डॉक्टर अंबेडकर बौद्ध क्यों बने ?, डॉक्टर अंबेडकर : एक पुनर्मूल्यांकन लोकतंत्र में भागीदारी के सवाल, कांशीराम के दो चेहरे, संत रैदास : एक विश्लेषण, मनुस्मृति : प्रति क्रांति का धर्मशास्त्र, डॉक्टर अंबेडकर को नकारे जाने की कोशिश, दलित धर्म की अवधारणा, अंबेडकर चिंतन के 3 अध्याय ।

अनुवाद - अंधकार में ज्योति और नागरिक धर्मपाल का जीवन 

संपादन - वाल्मीकि वाणी, मुक्त भारत, माँझी, जनता ।

📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖

 सुशीला टॉकभरे



सुशीला टाकभरे का जन्म 4 मार्च सन 1954 ईस्वी को बानापुरा जिला होशंगाबाद मध्य प्रदेश में हुआ था । 

शिक्षा : एम० ए० (हिंदी साहित्य) अंबेडकर विचारधारा, B.Ed, पीएचडी (हिंदी साहित्य) 

प्रकाशित कृतियां 

काव्य संग्रह : स्वाँति बूँद और खारे मोती
तुमने उसे कब पहचाना

हिंदी साहित्य के इतिहास में नारी, भारतीय नारी : समाज और साहित्य के ऐतिहासिक संदर्भों में,
परिवर्तन जरूरी है, टूटता वहम, अनुभूति के घेरे, 
संघर्ष, हमारे हिस्से का सूरज


📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖

8. सूरजपाल चौहान 



सूरजपाल चौहान का जन्म 20 अप्रैल 1955 में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जनपद में हुआ था ।

📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖

9. असंग घोष



हिंदी दलित साहित्य  के महत्वपूर्ण कवि असंगघोष का जन्म 29 अक्टूबर सन् 1962 को मध्य प्रदेश के जावद नामक छोटे से कस्‍बे में दलित परिवार में हुआ था । प्रारंभिक शिक्षा अपने कस्‍बे में और लंबे अंतराल के बाद रानी दुर्गावती विश्‍वविद्यालय, जबलपुर से स्‍वाध्‍यायी छात्र के रूप में एवं इसके बाद इग्‍नू जबलपुर सेंटर से एम.ए. (इतिहास), एम.ए. (ग्रामीण विकास), एम.बी.ए. (मानव संसाधन), तथा पीएच.डी. की पढ़ाई पूरी की । बचपन से पिताजी के जूता बनाने के काम में सहयोग कर काम सीखा बाद में लगभग 10 वर्ष स्‍टेट बैंक की नौकरी और अब सरकारी सेवा में रहते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा तक का लंबा सफर तय किया । आप प्रारंभ में बैंक कर्मियों के मार्क्‍सवादी आंदोलन से जुडे़ एवं कई आंदोलनों शरीक रहे । बाद में 1990 के आसपास अम्‍बेडकरवादी आंदोलन से जुडा़व हुआ और दलित लेखन में कविता विधा को अपनाया । आज हिन्‍दी दलित साहित्‍य के प्रमुख कवियों में शामिल किये जाते हैं । 

आपके संपादन में जबलपुर से दलित साहित्‍य की प्रमुख एवं प्रखर पत्रिका 'तीसरा पक्ष' का नियमित प्रकाशन हो रहा है । इनकी रचनाऍं विभिन्‍न विश्‍वविद्यालयों के हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल हैं तथा कविताओं पर कई शोधार्थियों द्वारा शोध कार्य किया जा रहा है ।

पुरस्कार


  • मध्य प्रदेश दलित साहित्य अकादमी, उज्जैन द्वारा पुरस्कृत (2002)
  • प्रथम सृजनगाथा सम्मान-2013
  • गुरू घासीदास सम्‍मान
  • भगवानदास हिन्‍दी साहित्‍य सम्‍मान 2017
  • उर्वशी सम्‍मान 2017
  • स्‍व. केशव पाण्‍डेय स्‍मृति कविता सम्‍मान 2019

कविता संग्रह


  • खामोश नहीं हूँ मैं,
  • हम गवाही देंगे
  • मैं दूँगा माकूल जवाब,
  • समय को इतिहास लिखने दो
  • हम ही हटाएंगे कोहरा
  • ईश्‍वर की मौत
  • अब मैं सॉंस ले रहा हूँ
  • बंजर धरती के बीज

📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖




Reactions

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ