हिंदी शिक्षण B.Ed. द्वितीय वर्ष (3rd Semester)



हिंदी साहित्य का इतिहास 

आदिकाल 

अपभ्रंश रचनाएं 
विजयपाल रासो : नल्ल सिंह
हम्मीर रासो : शारंगधर
कीर्ति लता : विद्यापति
कीर्ति पताका : विद्यापति

हिंदी रचनाएं 
खुमान रासो : नरपति नाल्ह
पृथ्वीराज रासो : चंदबरदाई
जयचंद प्रकाश : भट्ट केदार
जयमयंक जसचंद्रिका : मधुकर
परमाल रासो : जगनिक
खुसरो की पहेलियां : अमीर खुसरो
विद्यापति पदावली : विद्यापति

भक्तिकाल 

निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा के कवि  
कबीरदास, रैदास, दादू दयाल, सुंदर दास, रज्जब, शेख फरीद, मलूक दास, नानक
निर्गुण प्रेमाश्रयी शाखा के कवि  
मलिक मोहम्मद जायसी, कुतुबन, मंझन, उस्मान, मुल्ला दाउद ।
सगुण रामाश्रयी शाखा के कवि 
तुलसीदास, अग्रदास, नाभादास, प्राणचंद चौहान और हृदय राम ।
सगुण कृष्णाश्रयी शाखा के कवि
सूरदास, कुंभन दास, नंददास, रसखान और मीराबाई ।

रीतिकाल 

रीतिबद्ध : चिंतामणि, केशवदास, भूषण, मतिराम और पद्माकर
रीतिमुक्त : घनानंद, आलम, बोधा, ठाकुर
रीतिसिद्ध : बिहारी

आधुनिक काल 

भारतेंदु काल 
भारतेंदु हरिश्चंद्र श्रीधर पाठक प्रेम धन जगमोहन सिंह
द्विवेदी काल 
महावीर प्रसाद द्विवेदी श्यामसुंदर दास गुलाब राय जयशंकर प्रसाद सरदारपुर सिंह चंद्रधर शर्मा गुलेरी मिश्र बंधु बालमुकुंद गुप्त
छायावाद 
आचार्य रामचंद्र शुक्ल, राय कृष्णदास, जयशंकर प्रसाद, प्रेमचंद, गुलाब राय, हजारी प्रसाद द्विवेदी, नंददुलारे वाजपेयी, हरि कृष्ण प्रेमी, सुमित्रानंदन पंत, माखनलाल चतुर्वेदी, पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र', सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', महादेवी वर्मा ।
छायावादोत्तर  
हजारी प्रसाद द्विवेदी, महादेवी वर्मा, अमृतलाल नागर, वृंदावनलाल वर्मा, सेठ गोविंद दास, सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय', इलाचंद्र जोशी, जैनेंद्र कुमार, रांगेय राघव, यशपाल, फणीश्वर नाथ रेणु, लक्ष्मीनारायण मिश्र, रामवृक्ष बेनीपुरी ।
नवलेखन
अज्ञेय, धर्मवीर भारती, भारत भूषण अग्रवाल, गिरिजाकुमार माथुर, भवानी प्रसाद मिश्र, उपेंद्र नाथ 'अश्क', डॉ नगेंद्र, विद्यानिवास मिश्र, भगवती चरण वर्मा, विष्णु प्रभाकर, कमलेश्वर, राजेंद्र यादव, शिवानी, ऊषा देवी ।

संविधान और हिंदी 

भारतीय संविधान में स्वीकृत भाषाओं की सूची
भारत 114 प्रमुख भाषाओं वाला बहुभाषी देश है । भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में हिंदी सहित 14 प्रादेशिक भाषाओं को स्वीकृत किया गया था । परंतु संशोधन के उपरांत अब भारतीय संविधान में 22 भाषाएं स्वीकृत हैं । यह संशोधन 2007 में हुआ था । यह 71 वां संशोधन था ।

1.असमिया 2.बंगला 3.फोटो 4.डोंगरी 5.गुजराती 6.हिंदी 7.कन्नड़ 8.कश्मीरी 9.को कड़ी 10.मैथिली 11.मलयालम 12.मणिपुरी 13.मराठी 14.नेपाली 15.उड़िया 16.पंजाबी 17.संस्कृत 18.संथाली 19.सिंधी 20.तमिल 21.तेलुगू 22.उर्दू

संविधान के अनुच्छेद 346 में देवनागरी लिपि में हिंदी को केंद्र सरकार की कार्यालयीय भाषा का दर्जा दिया गया है ।

भाषा 

भाषा का अर्थ एवं परिभाषा
भाषा के विकास में तीन शक्तियां आधार है -
बुद्धि, विचार और चिंतन शक्ति ।

व्युत्पत्ति की दृष्टि से देखें तो भाषा शब्द संस्कृत की भाष् धातु से बना है जिसका अर्थ व्यक्त अर्थात् प्रकट की गई या उच्चरित की गई वाणी है । इंग्लिश में भाषा के लिए लैंग्वेज शब्द का प्रयोग किया जाता है जिसका संबंध लैटिन के शब्द लिंगवा (चिह्न) से एवं फ्रांसीसी शब्द लॉन्ग (लैंग्वेज) से है । इस प्रकार लैंग्वेज शब्द भी मानवीय बोली का ही वाचक है ।

"मनुष्य अपने भावों और विचारों को व्यक्त करने के लिए जिस माध्यम का प्रयोग करता है, उसे भाषा कहते हैं ।"

भाषा की प्रकृति व विशेषताएं
1. भाषा भाव और विचारों की अभिव्यक्ति का माध्यम है ।
2. भाषा का विकास और जन और प्रयोग तीनों ही समाज में होते हैं ।
3. भाषा का हस्तांतरण होता है भाषा परंपरा से प्राप्त होने के साथ-साथ अर्जित भी करनी पड़ती है सीखने से भाषा का आयोजन होता है ।
4. भाषा सामाजीकरण का एक आयाम है । व्यक्ति जिस समाज में रहता है, उसकी भाषा सीखता है
5. भाषा मौखिक तथा लिखित प्रतीकों, शब्दों, संकेतों व चिन्हों, को सम्मानित करती है ।
6. भाषा अनुकरण से सीखी जाती है ।
7. भाषा एक सतत परिवर्तनशील प्रक्रिया है ।
8. भाषा मनुष्य की वह कला है जिसमें बोलने, लिखने, पढ़ने, सुनने का कौशल सम्मिलित होता है ।
9. भाषा में परिवर्तन की गति बहुत धीमी होती है और अलक्षित होती है ।

मातृ भाषा
मातृभाषा का अर्थ
अंग्रेजी भाषा शास्त्री बेलार्ड के अनुसार -
"माता से सुनकर सीखी हुई घर की बोली को माता की भाषा और समाज की संवहित भाषा को मातृभाषा की संज्ञा दी गई है ।"

देवनागरी लिपि 

देवनागरी लिपि की विशेषताएं
देवनागरी लिपि सभी भारतीय लिपियों में संबंध स्थापन की लिपि रही है ।
उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश बिहार हिमाचल प्रदेश आदि हिंदी प्रदेशों की लिपि है ।
संस्कृत, पाली, प्राकृत, अपभ्रंश के लिए देवनागरी लिपि का प्रयोग होता है ।
देवनागरी लिपि अखिल भारत में व्याप्त है देवनागरी लिपि में भारतीय भाषाओं में प्रसिद्ध सभी ध्वनियों को अंकित करने की क्षमता है ।
देवनागरी लिपि में एक वर्ण का एक ही उच्चारण होता है । वर्णों का विन्यास ध्वनि विज्ञान के सिद्धांतों के अनुकूल है । स्वर अलग व्यंजन अलग स्वरों में भी मूल स्वर पहले संयुक्त स्वर बाद में भाषाओं की दृष्टि से देवनागरी वर्णमाला पूर्ण है । इसमें ह्रस्व और दीर्घ का भेद स्पष्ट है ।


भाषा नीति 

स्वतंत्रता से पूर्व भाषा नीति
स्वतंत्र भारत की भाषा नीति

भाषा के विविध रूप

हिंदी के विविध सृजनात्मक आयाम 

कार्यालय हिंदी वाले और व्यापार क्षेत्र में हिंदी
वैज्ञानिक और तकनीकी के क्षेत्र में
सामाजिक विज्ञान में
संचार के माध्यम संचार माध्यमों की भाषा
विज्ञापन के क्षेत्र में हिंदी
विज्ञापन माध्यमों की

भाषायिक विकास की विभिन्न अवस्थाएं, विशेषताएं एवं प्रकृति 

प्राचीन भारतीय आर्य भाषाएं
वैदिक संस्कृत
लौकिक संस्कृत संस्कृत
मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषाएं
प्राचीन प्राकृत या पाली
मध्यकालीन प्राकृत
सौरसेनी
महाराष्ट्र गधी
अर्धमगधी
पैशाची

पर कालीन प्राकृत अपभ्रंश
आधुनिक भारतीय आर्य भाषाएं
पश्चिमी हिंदी
पश्चिमी हिंदी की बोलियां
राजस्थानी
गुजराती
मराठी
बिहारी
बंगाली
उड़िया

पूर्वी हिंदी
सिंधी
पंजाबी
पहाड़ी

शिक्षण उद्देश्यों का वर्गीकरण

हिंदी शिक्षण के सामान्य उद्देश्य
उद्देश्यों का विश्लेषण
ज्ञानात्मक उद्देश्य
रसात्मक एवं समीक्षात्मक उद्देश्य
सृजनात्मक उद्देश्य
अभिवृत्ति आत्मक उद्देश्य

हिंदी का पाठ्यक्रम
प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा शिक्षण के उद्देश्य
प्राथमिक स्तर के अंत तक भाषा अधिकारी
माध्यमिक स्तर पर मातृभाषा शिक्षण के उद्देश्य
उच्चतर माध्यमिक स्तर पर मातृभाषा शिक्षण के उद्देश्य की शिक्षण पाठ्यक्रम की आवश्यकता पाठ्यक्रम का क्षेत्र वस्तु

स्तर की शिक्षा में मातृभाषा की परिभाषा सूत्र
प्राथमिक शिक्षा में त्रिभाषा सूत्र
उच्च शिक्षा में त्रिभाषा सूत्र
माध्यमिक शिक्षा में त्रिभाषा सूत्र
त्रिभाषा सूत्र का प्रवर्तन
त्रिभाषा सूत्र का विश्लेषण
हिंदी भाषा शिक्षण की समस्याएं और समाधान
हिंदी भाषा का शिक्षण सिद्धांत एवं सूत्र
सहित कौशलों का शिक्षण भाषाई कौशलों का विकास
भाषाई कौशलों का महत्व भाषा के कौशल भाषा कौशल भाषाई कौशल अपेक्षाएं
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