नागपंचमी का सच


नागपंचमी का अर्थ 

नागपंचमी शब्द दो शब्दों नाग और  पंचमी से मिलकर बना है, जिसके दो अर्थ हैं । नागपंचमी का पहला अर्थ है - ' नागों की पंंचमी ' और दूूूूसरा अर्थ है - ' पांच नागों का समूह '।

हिन्दी में नाग शब्द के पर्यायवाची शब्द हैं - सांप, हाथी, पहाड़ और राजा ।

पहले अर्थ के आधार पर यह समझा जाता है कि नागपंचमी श्रावण (सावन) महीने के शुक्ल पक्ष में पांचवें दिन मनायी जाती है । हिन्दू लोग इसी पहले अर्थ का ही प्रचार करते हैं । दूसरे अर्थ के आधार पर पांच नागवंशी राजाओं के अस्तित्व का पता चलता है, जिसका प्रामाणिक इतिहास भी है ।

नागपंचमी का ऐतिहासिक सच 

नागपंचमी का यह त्यौहार उन पांच महान पराक्रमी नागवंशी राजाओं की याद में मनाया जाता था, जिन्होंने बुद्ध के संदेश को पूरे भारत भर में पहुँचाया । उनके नाम थे अनंत, वासुकि, तक्षक, कर्कटक और ऐरावत 

उनके गणतांत्रिक स्वरूप में स्वतंत्र राज्य अस्तित्व में थे । नागराजा अनंत के नाम पर जम्मू - कश्मीर में अनंतनाग शहर है ।  नागराजा वासुकि कैलास - मानसरोवर क्षेत्र के प्रमुख थे ।
 नागराजा तक्षक की याद में तक्षशिला है । नागराजा कर्कटक और ऐरावत का क्षेत्र रावी नदी के पास था ।

इन सभी क्षेत्रों के लोग पांचों पराक्रमी नागवंशी राजाओं की याद कायम रखने के लिए हर साल एक समारोह आयोजित करते थे, जिसे बाद में नागपंचमी के नााम से जाना जाने लगा । इस समारोह का अनुसरण आस - पास के क्षेत्रों के लोग भी करने लगे । इस प्रकार यह त्यौहार पूरे भारत में मनाया जाने लगा । 

नागपंचमी का भौगोलिक सच 

नाग शब्द का संबंध केवल सांप से ही नहीं है । भारत  में नागालैण्ड नामक एक प्रदेश भी है, नागपुर नामक एक नगर भी है , नाग नामक एक नदी भी है और नाग नामक एक जाति भी है ।

बाबा साहेब डाॅ० भीमराव अम्बेडकर जी ने 14 अक्टूबर सन् 1956 ई० को बौद्ध धम्म की दीक्षा लेने के लिए नागपुर नगर को इसीलिए चुना था और कहा था - " हम नागवंशी क्षत्रिय हैं । "

नागपंचमी का वैज्ञानिक सच 

यह वैज्ञानिक सच है कि सांप दूध नहीं पी सकता । जिन जीव - जंतुओं की जीभ दो हिस्सों में होती है, वे पेय पदार्थों को अंदर नहीं खींच सकते । अगर गलती से सांप दो - चार बूंद भी दूध पी ले तो वह बीमार पड़ जाता है, क्योंकि सांप कैल्शियम को नहीं पचा सकता ।

इसलिए नागपंचमी का संबंध साँप से जोड़ना सर्वथा गलत है ।

नागपंचमी हिन्दुओं का त्यौहार नहीं है 

नागपंचमी हिन्दुओं का त्यौहार नहीं है । यह ऐतिहासिक सच है कि ब्राह्मण धर्म ( जिसे बाद में हिन्दू धर्म कहा जाने लगा ) को सदैव केवल बौद्ध धम्म से ही खतरा रहा है, क्योंकि बौद्ध धम्म आत्मा - परमात्मा को नहीं मानता और ब्राह्मण धर्म ( हिन्दू धर्म ) आत्मा - परमात्मा पर ही टिका हुआ है । अतः ब्राह्मणों ने जब देखा कि नागवंंशी बौद्ध राजाओं की याद में नागपंचमी का त्यौहार मनाया जा रहा है, तो उन्होंने इसका पूरी तरह से ब्राह्मणीकरण कर दिया ।

भारत की भोली - भाली अनपढ़ जनता चालाक ब्राह्मणों के इस कुचक्र में बहुत ही आसानी से उलझ गयी । ब्राह्मण अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए भावुकता और भय को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने लगे । वे नागराज और शेषनाग को सांंप की एक प्रजाति बतानेे लगे और उनसे संबंधित भावात्मक कहानियाँ गढ़कर उनका प्रचार करने लगे ।

नागपंचमी बौद्धों का त्यौहार है 

नागपंचमी बौद्धों का त्यौहार है । अतः इस त्यौहार को बौद्ध रीति से मनाया जाना चाहिए । दिल्ली स्थित सम्यक् प्रकाशन  के प्रकाशक और लेखक शांतिस्वरूप बौद्ध जी ने अपनी पुस्तक 'बौद्ध चर्या प्रकाश' में नागपंचमी मनाने का कारण और विधि का व्यवस्थित उल्लेख किया है ।
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