संतशिरोमणि गुरु रविदास जी की प्रामाणिक जीवनी


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संत रविदास संबंधी किंवदंतियों का अंत 

1. संत रविदास का वास्तविक नाम क्या है ?

संत रविदास के नाम को लेकर कुछ लोगों के मन में यह भ्रम है संत रविदास का नाम रविदास है या रैदास । इन दोनों नामों में कौन सा नाम सही है ?

सच तो यह है कि रविदास शब्द संस्कृतनिष्ठ तत्सम शब्द है जबकि रैदास मूल अपभ्रंश शब्द है । निश्चित रूप से गुरुजी का नाम रैदास ही रहा । कालांतर में उनका नाम परिवर्तित और संशोधित होकर के रविदास हो गया ।

2.  संत रविदास का जन्म कब और कहां हुआ था ?

हिंदी के सभी विद्वानों ने यही स्वीकार किया है कि संत रविदास का जन्म काशी स्थित मंडूर ग्राम (मंडुवाडीह) में हुआ । संत रविदास का जन्म मूलतः मंडूर ग्राम में ही हुआ था किंतु उनके अनुयायियों ने उनका धाम वहां न बनाकर सीर गोवर्धनपुर ग्राम में बनाया । इसलिए कहा जा सकता है कि भले ही उनका जन्म मंडूर ग्राम में हुआ था किंतु उनका जन्मस्थली धाम सीरगोवर्धनपुर ही है ।

3. संत रविदास की जाति और वंश क्या है ?

संत रविदास की जाति चमार (चर्मकार) थी और उनका वंश चंद्रवंश था । अपनी जाति के विषय में स्वयं संत रविदास जी ने लिखा है -

 जाकर कुटुंब केडोर सब धोती अजय बनारसी आसपास

" मेरी जाति कमीनी, पांति कमीनी 

ओछा जनुम हमारा । "


4. संत रविदास के परिजनों का नाम क्या है ?

संत रविदास के पिताजी का नाम राहुल राव तथा माता जी का नाम कर्मावती देवी था । रविदास की पत्नी का नाम लोढ़ा देवी तथा एक पुत्र था, जिसका नाम विजयदास था ।

5. संत रविदास की विचारधारा कैसी है ?


रविदास की धार्मिक विचारधारा ?

संत रविदास की धार्मिक विचारधारा जानने के लिए यह जानना आवश्यक है कि उनके जीवन से संबंधित जो चमत्कारिक जन श्रुतियां कही जाती हैं, क्या वे सही हैं ? इस विषय में डॉक्टर विजय कुमार 'त्रिशरण' जी ने अपनी पुस्तक 'महाकवि रविदास और चमत्कारिक जन श्रुतियां' में लिखा है -

बौद्ध लेखक स्वरूपचंद्र बौद्ध अपनी पुस्तक 'बौद्ध विरासत की पुरोधा गुरु रैदास' में संत रैदास को बुद्ध विचारधारा का संत सिद्ध करते हुए लिखा है । 'श्रमण परंपरा और गुरु रविदास' नामक पुस्तक में डॉक्टर महेश प्रसाद अहिरवार ने भी संत रैदास जी को श्रमण परंपरा यानी बौद्ध परंपरा का संत स्वीकार किया है ।

रविदास के गुरु का क्या नाम है ?

संत रविदास जी के गुरु का नाम शारदानंद (रैवतप्रज्ञ) था, रामानंद उनके गुरु नहीं थे ।

विपरीत ब्राह्मण की स्थिति उन्हीं के शब्दों में, ब्राह्मण द्वारा स्वांतः सुखाय भाषा में -

" हम बढ़ कवि, कुलीन हम पंडित 
हम जोगी सन्यासी 
ज्ञानी गुणी सूर हम दाता 
यहु मति करें न नासी
पढ़ै गुने कुछ समझि न परहि
जो लौ भाव न दरसे 
लोहा हिरन होय धो कैसे 
जो पारस नहिं परसै । "


फल कारण फुले बन रहा है उपजे फल तब्बू पिलाए ज्ञान ही कारण कर्म कराएं उपजे ज्ञान तो कर्म नशा है 

रविदास के शिष्यों का क्या नाम है ?

गुरु रविदास जी की प्रामाणिक जीवनी

संतशिरोमणि के नाम से चर्चित संत रविदास जी की जीवनी से संबंधित बहुत सी लोककथाएँ भारतीय समाज में सुनने को मिलती हैं | इधर कुछ वर्षों से हो रहे नवीन शोधों के फलस्वरूप यह ज्ञात हुआ है कि उन सभी लोककथाओं में कुछ को छोड़कर शेष सभी निराधार और काल्पनिक हैं |

जन्म 

संत शिरोमणि गुरु रविदास जी का जन्म वाराणसी जिले के सीर गोवर्धनपुर गांव में हुआ था इनके पिता जी का नाम राहुल राव तथा माता जी का नाम कर्मावती देवी था । उनके पिताजी ढोर ढोने का कार्य करते थे । इस कार्य के लिए वे दूर-दूर तक जाया करते थे ।

विवाह 

रैदास का विवाह लोना नाम की कन्या से हुआ था विवाह के पश्चात भी रैदास अपने ध्यान और साधना में मग्न रहा करते थे और अपनी पत्नी को बहुत समय नहीं दे पाते थे इस कारण उनकी पत्नी लोना देवी उनसे अप्रसन्न रहती थीं । फिर भी वह अपने पति से कभी भी इस बात की शिकायत नहीं करती थी, क्योंकि वह जानती थी कि उनके पति रैदास का स्वभाव कैसा है ।

भ्रमण  

संत रैदास जी ने अपनी संपूर्ण जीवन काल में काशी के अतिरिक्त मिर्जापुर भदोही पंजाब-हरियाणा छत्तीसगढ़ राजस्थान जयपुर गुजरात महाराष्ट्र आदि नगरों का भ्रमण किया । जहां जहां भी ले गए वहां वहां उन्होंने अपने सम्यक प्रवचन से लोगों को सम्यक मार्ग का संदेश दिया ।

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निर्वाण मृत्यु

संत रैदास जी की मृत्यु के विषय में बताया जाता है कि उनकी मृत्यु 150 वर्ष की आयु में हुई थी । किंतु लेखक सतनाम सिंह ने उनकी मृत्यु को एक बलि दान के रूप में देखा है । उनका कहना है कि संत रैदास जी की मृत्यु प्राकृतिक मृत्यु नहीं हुई थी बल्कि उनकी हत्या की गई थी । उनकी हत्या के विषय में उन्होंने विस्तृत रूप से एक पुस्तक भी लिखी है, जिसका नाम है - " गुरु रविदास जी की हत्या के प्रमाणिक दस्तावेज " ।उन्होंने इस पुस्तक में निम्नलिखित दस्तावेजों के आधार पर उनके हत्या को प्रमाणित किया है -

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संदर्भ ग्रंथ 

संत रविदास की प्रामाणिक व समीक्षात्मक जीवनी का उल्लेख करने वाली प्रमुख पुस्तकों के नाम निम्नलिखित हैं -

1. रैदास की वाणी : वेल्वेडियर प्रेस,
2. संत रैदास और उनका काव्य : सं० रामानंद शास्त्री एवं वीरेन्द्र पाण्डेय
3. संत सुधा सार : सं० वियोगी हरि
4. संत काव्य : परशुराम चतुर्वेदी
5. संत रैदास - व्यक्तित्व एवं कृतित्व : संगमलाल पाण्डेय
6. संत रैदास : डॉ० जोगिन्दर सिंह
8. संत रविदास : रतनचन्द
10. संत गुरु रविदास वाणी : डॉ० वेणीप्रसाद शर्मा
11. संत रविदास - जन रविदास : डॉ० एस०के० पंजम
12. संत रविदास - विचारक और कवि : डॉ० पद्मगुरुचरण सिंह
13. रैदास दर्शन : डॉ० पृथ्वीसिंह आजाद
14. श्रमण परंपरा और गुरु रैदास : डॉ० एम० पी० अहिरवार
15. रैदास : डॉ० धर्मपाल मैनी
16. महाकवि रविदास और चमत्कारिक जनश्रुतियाँ : डॉ० विजय कुमार 'त्रिशरण'
17. संत रैदास की मूल विचारधारा : परिनि० श्याम सिंह
18. संत रैदास वाणी में बौद्ध चिंतन : आचार्य भद्रशील रावत
19. बौद्ध विरासत के पुरोधा गुरु रैदास : स्वरूपचन्द्र बौद्ध
20. भगवान रविदास की सत्यकथा : रामचरण कुरील

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