देवचन्द्र भारती 'प्रखर' की संघर्ष यात्रा

धम्म साहित्यकार देवचन्द्र भारती 'प्रखर' 
 


बाबा साहेेब डाॅ० भीमराव अम्बेडकर जी की विचारधारा से जुड़े साहित्यकारों में देवचन्द्र भारती 'प्रखर' का नाम बड़े ही आदर के साथ लिया जाता है।

देवचन्द्र भारती 'प्रखर' का संक्षिप्त परिचय  

जन्म - 05 अगस्त  1991 ई०
* शिक्षा - एम०ए० (हिन्दी) नेट
* पेशा - शिक्षक व साहित्यकार
* पिताजी - श्रद्धेय जयश्री प्रसाद
* माताजी - श्रद्धेया सुशीला देवी
* छोटा भाई - भूपचन्द्र भारती
* बहनें - गीता, अनीता, सरिता
      

जन्मस्थान व पता
ग्राम - कटसिल , पोस्ट - दिघवट
तहसील - सकलडीहा , जिला - चन्दौली
उत्तर प्रदेश , भारत - 232108
* मोबाइल नंबर - 9454199538


साहित्यिक संघर्ष        
 
  
'प्रखर' जी की साहित्यिक यात्रा 14 वर्ष की आयु से आरंभ  हुई है । पुस्तक के रूप में प्रकाशित उनकी प्रथम कृति 'वैवाहिक शायरी' थी ।

प्रकाशित रचनाएँ 

(1) वैवाहिक शायरी 
(2) विद्यालय गीत 
(3) ज़ुनून 
(4) देशप्रेम 
(5) वेदना की शांति 
(6) भोजपुरी बिरहा 
(7) सामान्य ज्ञान 
(8) बौद्धिक छंद सुगंध 


शिक्षण संघर्ष



आरंभ वर्ष - 2010 ई० (वाराणसी नगर से)

* वर्ष 2010 - 11 ई०
शिक्षण-संस्थान - ज्ञानोदय जू०हा० स्कूल, शैलपुत्री, वाराणसी
                                             
* वर्ष 2011 - 13 ई०
डॉ० अम्बेडकर शिक्षण संस्थान, सकलडीहा
                                               
* वर्ष 2014 - 15 ई०
दुर्गाप्रसाद इण्टर कॉलेज, फेसुड़ा, चन्दौली

* वर्ष 2015 - 16 ई०
सनशाइन कान्वेंट स्कूल, सैयदराजा
                                     
* वर्ष 2016 - 17 ई०
सरस्वती विद्या मंदिर, सकलडीहा स्टेशन
                                       
संगठन संघर्ष 

अंबेडकर मिशन और बौद्ध विचारधारा से जुड़ने के पश्चात देवचंद्र भारती 'प्रखर' ने सन 2012 से सामाजिक संगठनों और आंदोलनों में हिस्सा लेना आरंभ कर दिया था । संगठनों में जाने के लिए और कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए उन्हें साइकिल चलाकर जाना पड़ता था । साधन के अभाव में और गरीबी की स्थिति के कारण, उन्होंने अपने हर हालात से समझौता किया । 50 - 50 किलोमीटर तक जाड़ा, गर्मी और बरसात, हर मौसम में उन्होंने संगठन के लिए समय दिया और बेरोजगारी की हालत में अपनी थोड़ी सी कमाई का अधिकांश हिस्सा भी संगठन और समाज को समर्पित कर दिया । ऐसी स्थिति में उन्हें पारिवारिक तनाव का भी सामना करना पड़ा ।अंबेडकर मिशन को लेकर आम लोगों से थोड़ी - बहुत बहस भी हो जाया करती थी, जिसके परिणामस्वरूप लोगों के ताने और कुतर्क को भी झेलना पड़ा । इन सारी मुसीबतों से लड़ते हुए 'प्रखर' ने अपनी शिक्षा और अपने संघर्ष को जारी रखा और परिणाम स्वरूप उन्हें सफलता मिल ही गई । आज लोग उनकी बात को स्वीकार भी करते हैं और उनके बताए हुए रास्ते पर चलते भी हैं । उनके नीचे आज बहुत सारे नौजवान भी काम कर रहे हैं; साहित्यिक, सामाजिक और शैक्षिक तौर पर भी ।


सम्प्रति ........................................^

                           हिन्दी प्रवक्ता  -
शहीद कैप्टन विजयप्रताप सिंह महाविद्यालय, अवाजापुर, चन्दौली (उत्तर प्रदेश)
                           दिनांक -:- 17-08-2017 से ।

Devachandra Bharati Prakhar


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